मेलबोर्न. जयपुर के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के उत्तर—पश्चिमी तट पर तिमोर सागर में बना एक तेल का कुआं भीषण आग की चपेट में आ गया है।
समुद्र के बीच बने तेल के इस कुएं से रिसाव 21 अगस्त से ही हो रहा था और घटना के वक्त इस रिसाव को बंद करने की कोशिश की जा रही थी। इस कुएं से प्रतिदिन करीब 400 बैरल प्राकृतिक गैस और तेल का रिसाव हो रहा है। लेकिन अच्छी बात ये है कि इस आग से कोई हताहत नहीं हुआ है और वहां मौजूद सभी कर्मचारियों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है।
सोमवार को इस भीषण आग को बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन नाकाम रही। इस तेल के कुएं को संचालित करने वाली कंपनी पीटीटीईपी ऑस्ट्रेलेशिया मंगलवार को इसे बुझाने का दूसरा प्रयास करेगी। इस समुद्री तेल कुएं की तट से दूरी करीब 250 किलोमीटर है।
कंपनी के डायरेक्टर जोस मार्टिन के मुताबिक जल रहे कुएं को भारी समुद्री कीचड़ से बंद कर ही आग पर काबू पाया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के संसाधन और ऊर्जा मंत्री मार्टिन फग्र्यूसन ने कहा कि इस आग से देश की तेल-गैस इंडस्ट्री पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने ऐसी आग पहले कभी नहीं देखी। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक लीकेज से समुद्री जीवों को खतरा पैदा हो गया है।
ऑस्ट्रेलिया का ये तट पृथ्वी की एक चौथाई डॉल्फिन और व्हेल मछलियों का बसेरा है। वन्य जीव संगठन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, जीपीईजी और ऑस्ट्रेलियन मरीन कंजर्वेशन सोसाइटी इन जीवों को बचाने की मुहिम में आगे आए हैं और उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का दबाव बनाया है। संगठन के मुताबिक ये इलाका पृथ्वी पर समुद्री जीव-जंतुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में से एक है और इस तेल रिसाव से इलाके के समुद्री कछुओं, व्हेल, डॉल्फिन, समुद्री पक्षियों और समुद्री सांपों को भारी खतरा पैदा हो गया है।