रायगढ़. अप्रैल माह में शासन से हुए समझौते के अनुरूप एक भी मांग पूरी ना होने से क्षुब्ध होकर छग वन कर्मचारी संघ ने प्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर 09 से अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
इस दौरान रविवार से ही सैकड़ों की संख्या में वनकर्मियों ने कलेक्टोरेट परिसर के सामने पंडाल लगा कर अपना डेरा डाल दिया है। वहीं दिन-भर नारे-बाजी के साथ लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। वनकर्मी संघ के जिला अध्यक्ष मधुसुदन तिवारी का कहना है कि भर्ती नियम में संशोधन कर वनक्षेत्रपाल के 50 प्रतिशत पद पर तत्काल पदोन्नति, वन रक्षक, वनपाल को समयपान वेतनमान सहित दस सूत्रीय मांगांे को लेकर वनकर्मियों ने शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
वनकर्मी राजेश्वर मिश्रा ने बताया कि वन कर्मचारियों से लघु वनोपज संघ का कार्य नहीं लिया जाना चाहिए, साथ ही अनुकंपा नियुक्ति सहित आश्रित के नाबालिग होने की स्थिति में बालिग होने पर व बाल वनरक्षक के पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए।
वहीं धरने पर बैठे वन विभाग के कर्मचारियों की मानें तो वनरक्षक के 1000 पद निर्मित किए जाने, 44 प्रतिशत वन के आधार में जिस प्रकार भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के पद निर्मित कर वन विभाग के सेट अप को पिरामिड आकार दिया जाने की मांग जब तक पूरी न हो जाए उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
दूसरी ओर सरकार द्वारा मांगों को पूरा नहीं करने पर आक्रोशित वन कर्मी बताते हैं कि प्रारंम्भिक दौर में वनकर्मी केवल हड़ताल पर बैठे हैं आगामी समय में इस आंदोलन को व्यापक रूप भी दिया जा सकता है। वर्तमान में ही वन मंडल की क्रय समिति में संघ के जिलाध्यक्ष को शामिल कर उच्च गुणवत्ता की संपूर्ण गणवेश सामाग्री क्रय किए जाने सहित घोषित शासकीय अवकाश लगभग 90 दिन का उपयोग करने का अधिकार कार्यपालिक वन कर्मचारियों को दिए जाने जैसी अनेक मांगों को एक बार फिर उठाया गया है। इस हड़ताल से वनों को होने वाली हानि व जनता को होने वाली परेशानियों के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार ठहराते हुए वनकर्मियों का धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।