टिकट पाने के लिए जोर आजमाइश
भास्कर न्यूज Tuesday, November 03, 2009 05:49 [IST]  

जगदलपुर. निगम चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में टिकट के लिए कार्यकर्ता जोर लगा रहे हैं। भाजपा चूंकि सत्ता में है इसलिए हरेक कार्यकर्ता पार्षद बनने के लिए अपने संपर्क सूत्र और प्रभावशाली नेताओं का सहारा लेने लगे हैं। जनसेवक बनने का जुनून कार्यकर्ताओं में दिख रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस में इक्का-दुक्का लोग ही दावेदारी कर रहे हैं।



आरक्षित वार्ड में खामोशी है। वहीं अनारक्षित वार्ड में मारामारी की स्थिति है। सामान्य वर्ग के लिए टिकट मिलने से कई समाज के लोग मैदान में कूदने का मन बना रहे हैं। वर्तमान पार्षद सीट आरक्षित होने से मायूस होकर अगल-बगल के वार्ड में संभावनाएं तलाश रहे हैं।



वहीं पिछले चुनाव से चूके लोग मायूस हो गए हैं। कुल मिलाकर सत्ता और संगठन के प्रभावशाली नेताओं का आशीर्वाद पाने कार्यकर्ता बढ़चढ़कर प्रयास में जुटे हैं। सांसद बलीराम कश्यप के अस्वस्थ होने से उनके मंत्री पुत्र केदार कश्यप, संगठन प्रभारी सुभाष राव, विधायक संतोष बाफना, अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कश्यप समेत विधायक डा. सुभाउ कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष बैदूराम कश्यप, जिलाध्यक्ष श्रीनिवासराव मद्दी, सांसद प्रतिनिधि सुधीर पांडेय, नगर मंडल अध्यक्ष श्रीधर ओझा से टिकट दिलवाने की गुजारिश करने लगे हैं।



साथ ही महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रानी चेरपा और युवा मोर्चा अध्यक्ष से भी टिकट दिलवाने की गुजारिश महिला कार्यकर्ता और युवा नेता कर रहे हैं। कोई भी नेता समर्थकों को निराश नहीं कर रहे हैं, ज्यादातर लोगों का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क करें जिनके साथ वार्ड के लोग समर्थन में हैं उन्हे ही टिकट मिलेगा। ऊपरी एप्रोज नहीं होने की बात जरुर कही जा रही है लेकिन मंत्री, विधायक और संगठन के प्रभावशाली नेताओं के नजदीकी लोग अपनी टिकट फाइनल होने की बात कहने लगे हैं।



ऐसी स्थिति में कुछ वार्डो में बगावत और पार्टी छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। जिसके लिए नेताओं को जांच परखकर जीतने योग्य कार्यकर्ता को चुनने में खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को स्थानीय नेताओं में जिलाध्यक्ष, नगर अध्यक्ष, महिला अध्यक्ष, युकांध्यक्ष से उम्मीद है। वहीं कुछ लोग राजधानी के बड़े नेताओं से संपर्क का फायदा उठाने की कोशिश में जुट गए हैं।



वैसे शहर में हाल फिलहाल भाजपा और कांग्रेस में ही जोर आजमाईश चल रही है। बाकी दल एनसीपी, सीपीआई, बसपा खेमे में खामोशी छाई है। आचार संहिता लागू होने और चुनाव की तारीख तय होने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।

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