मंत्रियों पर बिगड़ रहे समीकरण
प्रमोद वशिष्ठ Tuesday, November 03, 2009 06:49 [IST]  

राजधानी हरियाणा. हरियाणा में नए मंत्रिमंडल का गठन माथापच्ची भरा साबित हो रहा है। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता, निवर्तमान मंत्रियों के मंत्रिमंडल से बाहर बैठने की सुगबुगाहट ने राजनीति में गरमाहट ला दी है।



हालांकि पिछले तीन दिनों से तूफान से पहले की शांति जैसा आलम है, लेकिन अंदर ही अंदर पक रही खिचड़ी नया गुल खिलाने के संकेत दे रही है। खुद मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा मंत्रिमंडल गठन का सवाल पूछते ही खबरनवीसों से यह कहकर बात करते-करते चल देते हैं कि जब गठन होगा तो पता चल जाएगा।



जो नई बातें सामने आईं हैं, उनमें मंत्रिमंडल में कांग्रेस में समर्थन देने वाले विधायकों की मंत्रिमंडल में एडजेस्ट करने की मुहिम के चलते जातिगत समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। 6 या 7 नवंबर को मंत्रिमंडल के पत्ते खुलने की पूरी उम्मीद है।



बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व, जातिगत समीकरण, वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी व महिलाओं की भागीदारी को ध्यान में रखा जा रहा है। कांग्रेस को 6 या 7 पदों से संतोष करना पड़ सकता है। शेष मंत्री गैर कांग्रेसियों के बनने की उम्मीद है।



बताया जा रहा है कि कम से कम 4 या 5 निर्दलीय बाजी मारेंगे। बताया जा रहा है कि निर्दलीयों में जलेबखान, गोपाल कांडा, सुखबीर कटारिया, प्रहलाद गिल्लाखेड़ा, ओमप्रकाश जैन, शिवचरण शर्मा मंत्री पद के लिए अड़े हुए हैं।



जलेब खान के समर्थकों ने तो चंडीगढ़ में एक नवंबर को उनकी मौजूदगी में मंत्री बनने के संकेत दिए। खान सवाल को हंस कर टाल गए। बसपा के अकरम खान की भी पूरी उम्मीद है। दो मुस्लिम नेता आ जाते हैं मेवात के दिग्गज कांग्रेसी नेता खुर्शीद अहमद के बेटे आफताब को पद से वंचित रहना पड़ सकता है।



इधर, हजकां का बाहर से समर्थन देना लगभग तय है। अगर कुलदीप बिश्नोई पद लेते हैं तो हजकां के सतपाल सांगवान व राव नरेन्द्र सिंह का मंत्री बन सकते हैं। उनके पद नहीं लेने की स्थिति में धर्मसिंह छोकर या विनोद भ्याणा में से एक को तवव्जों रहेगी।



पिछले दिनों भजनलाल परिवार सहित बिश्नोई समाज के तीर्थ स्थल मुकाम भी जंभेश्वर भगवान के मत्था टेकने गए। ऐसे में तय माना जा रहा है कि उनकी मुराद पूरी हो चुकी है। निवर्तमान मंत्रियों में कैप्टन अजय सिंह यादव, किरण चौधरी व रणदीप सुरजेवाला का मंत्री बनना पुख्ता है।



सावित्री जिंदल की राह आसान नहीं है क्योंकि अगर वैश्य जाति से गोपाल कांडा व ओमप्रकाश जैन मंत्री बनते हैं तो उनका पद संकट में पड़ सकता है। निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष रघुबीर कादियान, संपत सिंह व निवर्तमान मुख्य संसदीय सविच धर्मबीर को ताकत लगानी पड़ रही है।



पता चला है कि संपत सिंह को मंत्री पद से रोकने के लिए कांग्रेस व हिसार का गैर कांग्रेसी खेमा ताकत लगाए हुए है। अहीरवाल में मंत्री पद को लेकर कम संघर्ष नहीं है। राव दानसिंह व अनिता यादव उम्मीद लिए हुए हैं तो सांसद राव इंद्रजीत सिंह अपने भाई यादवेन्द्र के लिए जुटे हुए हैं। अगर हजकां शामिल हो गई तो इनकी राह डगमगा जाएगी। कांग्रेस के साथ गैर कांग्रेसी विधायकों में दो ब्राrाण नेता होने के कारण कांग्रेस के ब्राrाण नेताओं की पार मुश्किल पड़ेगी।



कांग्रेस में महिलाओं की जंग



कांग्रेस को समर्थन देने वाले विधायकों में कोई महिला नहीं है, ऐसे में कांग्रेसी की महिलाओं तगड़ी जंग चल निकली है। पिछली बार चार महिला मंत्री थीं। इस बार तीन की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि डिप्टी स्पीकर का पद गैर कांग्रेसी दल की महिला को मिल सकता है।



तीन महिला विधायकों को मंत्री पद मिलने की उम्मीद है। इनमें किरण चौधरी व एससी व महिला कोटे और मुख्यमंत्री के क्षेत्र से गीता भुक्कल का नाम तो लगभग तय है। इसके अलावा सावित्री जिंदल, शारदा राठौर व सुमिता सिंह में से कोई बाजी मार सकती है। दौड़ में अनिता यादव भी हैं। जातिगत समीकरण के कारण जिंदल व यादव डगमगा रही हैं।

सोनिया की महिलाएं और राहुल के युवा



चर्चा यह भी है कि सोनिया गांधी के महिलाओं के प्रति ज्यादा रूझान को देखते हुए मंत्रिमंडल में महिलाओं पर विशेष मंथन किया जा रहा है। मंत्रिमंडल में तीन-चार महिलाएं तो जरूर होंगी। इसके अलावा राहुल के युवा फैक्टर पर भी ध्यान है। ऐसे में युवा विधायकों की छंटनी की जा रही है। मुख्यमंत्री हुड्डा इस प्रयास में हैं कि महिलाओं व युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

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