एक साल भी नहीं चलीं कुर्सियां
नवीन शर्मा Tuesday, November 03, 2009 07:08 [IST]  

बीकानेर. टेंडर के पचड़ों से बचने के लिए सरकारी महकमें जेल से खरीदारी करने लगे हैं लेकिन वहां से सामान मंगवाना अब परेशानी बन चुका है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के लाखों रुपए पिछले करीब डेढ़ साल से जयपुर और जोधपुर की जेलों में अटके पड़े हैं और यहां निदेशालय में सामान के अभाव में कर्मचारियों को परेशान होना पड़ रहा है।



निदेशालय को जरूरत का सामान मंगवाने के लिए पिछले साल करीब दस लाख रुपए का बजट मिला था। इस बजट से निदेशालय ने एक निजी फर्म से तीन लाख रुपए की लोहे की अलमारियां खरीद ली। कुर्सियां, लोहे के रैक और कूलर के लिए बीकानेर, जोधपुर और जयपुर की जेलों को ऑर्डर दे दिए।



लोहे के रैक खरीदने के लिए जयपुर जेल को दो लाख 99 हजार 80 रुपए तथा कूलर खरीदने के लिए जोधपुर जेल को एक लाख 98 हजार 45 रुपए के एडवांस चेक 23 अप्रैल 2008 को जारी किए गए थे। उसके बाद भी निदेशालय को अब तक सामान की सप्लाई नहीं मिली है। करीब डेढ़ साल के इस अंतराल में दो निदेशक बदल चुके हैं।हालात यह हैं कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के अनुभागों में फाइलें रखने के लिए लोहे के रैक तक नहीं है।



फाइलें इधर-उधर बिखरी रहती हैं। कई फाइलों के कवर फट चुके हैं। निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद श्याम सुंदर बिस्सा ने जब निदेशालय का निरीक्षण किया तो इस बात का खुलासा हुआ। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल प्रशासन के संपर्क में रहने के लिए पाबंद किया तथा सामान शीघ्र मंगवाने के निर्देश दिए थे।



निदेशालय के कार्मिकों ने जब जयपुर जेल प्रशासन से संपर्क किया तो जवाब मिला, निर्माण के लिए मैटेरियल ही उपलब्ध नहीं है। कुछ रैक बन गए लेकिन उन पर कलर नहीं हो पाया है। निदेशालय को अब रेक और कूलरों की सप्लाई का इंतजार है।



हम लगातार जेल प्रशासन के संपर्क में हैं। जोधपुर और जयपुर जेल प्रशासन को कहा जा चुका है। सप्लाई शीघ्र मिल जाएगी। यह सही है कि जेल से खरीदी गई कुर्सियां अब टूट चुकी हैं।



एम.एल.खींची, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन)

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