नई दिल्ली. दिल्ली की एक निचली कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसे में मरने वाले व्यक्ति की मुआवजा राशि लिंग के आधार पर तय नहीं की जा सकती। कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मरने वाली एक महिला के परिवार द्वारा दाखिल की गई मुआवजा राशि की अर्जी पर सुनवाई करते यह फैसला दिया है। कोर्ट ने मृतक के परिवारजनों को १क् लाख दस हजार रुपए देने का आदेश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने बीमा कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया हैं, जिसमें बीमा कंपनी ने कहा था कि मृतक महिला का परिवार उसकी कमाई पर निर्भर नहीं था। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि परिवार में कमाने वाली एक महिला के हिस्सें को भले ही समाज न माने, चाहें वह उस महिला की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद ही क्यों न हो।
लेकिन भगवान और कानून की नजरों में पुरुष और स्त्री एक समान है और एक कमाने वाली महिला की मौत होती है तो उस महिला के परिवार मुआवजा राशि पाने का पूरा अधिकार है। यह कहते हुए कोर्ट ने मृतक महिला आशा गुलाटी के परिवार को दस लाख दस हजार रुपए की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि एक अक्टूबर 2005 को की एक सड़क दुर्घटना में आशा की मौत हो गई थी। जिसके बाद उसके पति और बेटे ने कोर्ट में मुआवजा राशि के लिए अर्जी दाखिल की थी।