पानीपत. सर्दियां शुरू होते ही शुरू हरुई मीटर चोरी की वारदातें। एक हफ्ते के अंदर चार मीटर चोरी, मीटर की सुरक्षा के लिए निगम के पास कोई इंतजाम नहीं, चोरी के बाद उपभोक्ताओं को उठानी पड़ रही कई परेशानी।
केस-1
विकास नगर निवासी सुरेश का बिजली मीटर घर के बाहर खंभे पर लगा था। कुछ दिन पहले किसी ने उनका मीटर उड़ा लिया। निगम के दफ्तर गए तो वहां से फरमान मिला कि पहले थाने में चोरी का मामला दर्ज कराएं, उसके बाद मीटर लगाने के बारे में सोचा जाएगा।
केस-2
माडल टाउन निवासी विपिन मलिक का भी मीटर किसी ने चोरी कर लिया था। उनका मीटर भी बाहर खंभे पर लगा था। काफी भागमभाग की, तब जाकर तीन महीने बाद मीटर लग पाया। इस बीच उन्हें काफी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह तो सिर्फ बानगी है। बिजली निगम ने जब से बिजली मीटर को घर से बाहर लगाने का फरमान जारी किया है तब से उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कभी मीटर चोरी हो जाते हैं तो कभी मीटर जल जाते हैं।
उसके बाद नए मीटर के लिए उपभोक्ताओं को पहले थाने और बिजली निगम के चक्कर लगाने पड़ते है। दूसरी तरफ जब से सर्दियां शुरू हुई हैं तब से मीटर चोरी के मामले में काफी इजाफा हुआ है। पंद्रह दिन के अंदर चार बिजली मीटर चोरी होने का मामला प्रकाश में आया है।
इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। सेक्टर छह के अमित का कहना है कि बिजली निगम तरह-तरह की स्कीम बनाकर उपभोक्ताओं को पेरशान करता है। उन्हें यही चिंता रहती है कि कहीं कोई उनका मीटर चुरा न ले। सेक्टर 12 के जुगल किशोर कहते हैं कि चार-चार मीटर एक ही बाक्स में फिट कर दिए गए हैं।
ऐसे में यदि किसी एक मीटर में आग लग गई तो चारों ही मीटर जलने का खतरा बना रहता है। अधिकारी कहते हैं कि बाहर मीटर लगने से बिजली की चोरी रुकेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि अब मीटर और चोरी होने लगे हैं। उपभोक्ता को इसका कोई फायदा नहीं है।
यह थी योजना
बिजली चोरी रोकने के लिए निगम ने घर के बाहर मीटर लगाने की योजना शुरू की थी। इसके तहत सभी उपभोक्ताओं के मीटर घर के बाहर लगने थे। मीटर की सुरक्षा खुद उपभोक्ताओं को करनी थी। हालांकि यह अलग बात है कि अभी कई उपभोक्ताओं के मीटर बाहर लगने बाकी हैं।
दिक्कत है तो मुझसे मिलें
यह योजना सभी जिलों में लागू है। योजना के तहत मीटर की सुरक्षा उपभोक्ताओं को करनी होगी। चोरी के बाद किसी को मीटर लगवाने के लिए अगर दिक्कत आ रही है तो वह मुझसे मिल सकता है। - एसएल राय, कार्यवाहक सिटी एक्सईएन
जी का जंजाल बनी योजना
सुरक्षा के लिए लगाए गए मीटर बाक्स भी घटिया किस्म के हैं। बरसात के दिनों में अक्सर बाक्स में पानी जमा हो जाता है। इससे आग लगने का खतरा रहता है।
एक साथ चार-पांच मीटर लगाए जाते हैं। अगर एक मीटर में आग लग जाए तो सारे उसकी चपेट में आ जाते हैं।
चोरी या मीटर जल जाने के बाद उपभोक्ताओं को पहले थाने में एप्लीकेशन देनी होगी, उसके बाद ही नए मीटर की प्रक्रिया शुरू होगी।
नए मीटर लगने में करीब दो से तीन महीने लग जाते हैं। इस बीच उपभोक्ताओं को एवरेज बिल जमा करना होगा।
मीटर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की है, निगम का इससे कोई लेना-देना नहीं।
सभी मीटर बाहर लगेंगे।