फिर आई सिग्नेचर ब्रिज की याद
गणेश भट्ट Tuesday, November 03, 2009 07:22 [IST]  

Bridge नई दिल्ली. दिल्लीवालों को शीला सरकार अब सपनों का लॉलीपॉप देकर मनाना चाहती हैं। दरअसल बेतहाशा महंगाई से परेशान लोगों का गुस्सा विधानसभा उपचुनाव में साफ दिखाई दिया, जहां कांग्रेस को करारी शिकस्त का मुंह देखना पड़ा है। जनता नाराज न हो इसके लिए सरकार कुछ नया करने की बजाए पुराने वादों की पोटली टटोल रही है। इनमें से एक है सिग्नेचर ब्रिज। हवा में झूलता यह ब्रिज स्टील की मोटी तारें पर लटकाकर बनाया जाएगा।



यह तथाकथित आधुनिक ब्रिज वजीराबाद में यमुना नदी के किनारे बनाया जाना था। सरकार के दावों के मुताबिक इस यह ब्रिज एशिया का सबसे सुंदर व आधुनिक ब्रिज होगा व इसके दोनों छोर पर पर्यटकों के लिए पिकनिक स्पॉट और मनोरंजन केंद्र बनाए जाने हैं। इस पूरी परियोजना की लागत करीब एक हजार करोड़ रुपए है। सिग्नेचर बनाने की कवायद लगभग एक दशक पहले शुरू हुई थी।



शुरू में यह अनोखा ब्रिज बनाने के मुद्दे पर सरकार ने खूब वाहवाही लूटी लेकिन, बीते विधानसभा सत्र के दौरान ही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस परियोजना से पल्ला झाड़ते हुए फिलहाल इस परियोजना में कोई प्रगति न होने की बात कही थी। दरअसल मंहगाई व महंगाई को लेकर मचे हो-हल्ले ने सरकार को ठंडे पड़े सपनों को एक बार फिर जगाने पर मजबूर कर दिया है। महंगाई देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावी मुद्दा न रह गई हो पर दिल्ली सरकार महंगाई के चलते हुई बदनामी से खासी परेशान है।



दिल्ली में पिछले दिनों एक के बाद एक कई वस्तुओं की कीमतों में इजाफा किया गया है। दिल्ली में दूध महंगा हुआ फिर नंबर आया बिजली उसके बाद बसों का किराया महंगा हो गया। इसी मदरडेयरी ने भी दूध के दाम बढ़ा दिए। इस सब के बाद अब सरकार ने पानी के दाम बढ़ाने की योजना बना ली है, वहीं वित्त मंत्रालय गैस सिलेंडर पर दी जा रही सब्सिडी भी वापस लेना चाहता है। महंगाई के जिन्न से पीछा छुड़ाने के लिए सरकार सिग्नेचर ब्रिज का सहारा ले रही है।



इससे पहले भी बीते वषों में कई बार सिग्नेचर ब्रिज का काम शुरू किए जाने की घोषणा हुई, लेकिन यह ब्रिज नही बना। दिल्ली सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि जल्द होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को शामिल किया जाएगा। सिगनेचर ब्रिज से दिल्ली के लगभग २क् लाख लोगों को फायदा होगा। सरकार को लगता है कि अगर यह ब्रिज बनाने की कवायद फिर से शुरू हुई तो लोग महंगाई का मुद्दा भूल कर शायद एक बार फिर विकास को तरजीह देने लगें।

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