ग्वालियर. एक ओर जहां शिक्षा एक वृहद व्यापार के रूप में लोगों के सामने आई है वहीं एक स्कूल ऐसा भी है जो पूर्णत: नि:शुल्क है। जी हां आप ठीक समझे हम नि:शुल्क मुस्कान चिल्ड्रन स्कूल की ही बात कर रहे हैं।
पांचवी तक के इस विद्यालय में न सिर्फ पढ़ाई बल्कि कॉपी, किताब, बस्ता समेत बच्चे की जरूरत का हर सामान नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। लाल टिपारा मुरार में स्थित इस स्कूल का शुभारंभ चंदन सिंह पाल ने वर्ष 2000 में शुरू किया। स्कूल के खुलने के साथ ही निर्धन परिवार के 80 छात्र छात्राओं ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद साल दर साल यह विद्यालय तरक्की करता रहा 2009 तक विद्यार्थियों की संख्या 250 पर पहुंच गई।
बीच में कई बार उतार चढ़ाव भी आए। कई बार संख्या 350 को पार कर गई तो कई बार 200 से नीचे पहुंच गई, लेकिन तमाम विषमताओं के बाद भी स्कूल जस का तस है। चंदन सिंह की मानें तो स्कूल चलाने के लिए उसने न सिर्फ अपनी कमाई की पाई-पाई स्कूल में लगा दी बल्कि अपनी पत्नी के जेवर तक बेच दिए ताकि कोई भी निर्धन बच्च अनपढ़ न बचे। इसके अलावा उसकी बेटी भी अपनी तनख्वाह के पैसे स्कूल में लगा देती है।
आठवीं तक मान्यता चाहिए : पांचवीं तक बच्चों को शिक्षा देने का जिम्मा उठाने वाले चंदन सिंह पाल का कहना है कि पिछले काफी समय से वह स्कूल को आठवीं तक की मान्यता देने के लिए शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहा है लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ। यहां की शर्र्तो के हिसाब से उसे 25 हजार रुपए की व्यवस्था करनी है लेकिन पेशे से पेंटर वह परिवार और स्कूल को तो जैसे-तैसे चला रहा है, इतने पैसे कहां से लाए? उसने जिला शिक्षा अधिकारी को भी अपनी पीड़ा बताई लेकिन उसकी कोई मदद नहीं हुई।
तमाम हरुई घोषणाएं : स्कूल की सहायता के लिए स्थानीय स्तर से लेकर महामहिम राष्ट्रपति अब्दुल कलाम तक ने घोषणाएं की लेकिन स्कूल की शासन स्तर पर कोई मदद नहीं हुई।
* वर्ष 2003 में मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी विद्यालय पहुंचे और भ्रमण किया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार से प्रस्ताव मांगा। राज्य सरकार ने विद्यालय से प्रस्ताव मांगा। पूरा मामला प्रस्तावों में ही उलझ कर रह गया।
* वर्ष 2004 में ग्वालियर प्रवास के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम स्कूल के छात्रों से मिले। इसके बाद उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर स्कूल की सहायता करने के लिए उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।
* वर्ष 2006 में सोनिया गांधी ने पत्र लिखकर स्थानीय प्रशासन को स्कूल की उचित सहायता करने हेतु निर्देशित किया।
* वर्ष 2006 में ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पत्र लिखकर स्कूल की सहायता करने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया।
* वर्ष 2004 में तत्कालीन महापौर पूरन सिंह पलैया ने कहा कि वे नगर निगम से स्कूल को फर्नीचर और ड्रेस उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए उन्होंने 97750 रुपए का चेक भी तैयार करवा दिया लेकिन आज तक वह चेक स्कूल को नहीं मिला।