जड़ी-बूटियों का भी है शहर
संजय पाण्डेय Tuesday, November 03, 2009 08:03 [IST]  

ग्वालियर. शहर के मौसम को लेकर लोग भले ही चिंतित रहते हों लेकिन आपको यह जानकर हैरत होगी कि यहां का मौसम जड़ी बूटियों के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल है। यहां के वनों में औषधियों का इतना बड़ा खजाना है कि यदि शोध हो जाए तो यह एक बड़े उद्योग के रूप में सामने आ सकता है क्योंकि शहर के आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माताओं को 50 प्रतिशत से अधिक जड़ी बूटियां यहीं से प्राप्त होती हैं।



शहर के आसपास का हिस्सा लगभग पूरी तरह पेड़-पौधों से घिरा हुआ है। सामान्य रूप से हम इन्हें भले साधारण पेड़ समझते हैं लेकिन यदि विशेषज्ञों की मानें तो यहां बड़ी तादाद में औषधीय पौधे हैं। सिर्फ शहर के औषधालय और फार्मेसी संचालक ही नहीं बल्कि यहां की जड़ी बूटियां देश विदेश में भी सप्लाई की जाती हैं। शहर का मौसम यहां के रहवासियों के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय रहता है। कभी जरूरत से ज्यादा गर्मी तो कभी सर्दी, लेकिन विषय विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मौसम ही इन जड़ी बूटियों की बड़ी पैदावार का जिम्मेदार है।




500 प्रजातियों के पेड़-पौधे
विशेषज्ञ बताते हैं कि शहर के आसपास स्थित जंगल में करीब 500 से अधिक प्रजातियों के औषधीय पेड़-पौधे हैं। इनमें आंवला, अजरुन, हरण, बहेड़ा, अमलतास, खदिर, अश्वगंधा और शतावरी समेत कई पेड़ पौधे शामिल हैं। इसके अलावा कई लोगों ने अपने घर आंगन में भी इन औषधीय पेड़ पौधों को लगाया हुआ है।



40 प्रतिशत आपूर्ति यहीं से
फार्मेसी संचालकों की मानें तो उन्हें आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में जितनी भी जड़ी बूटियां लगती हैं उनमें से करीब 50 प्रतिशत से अधिक यहीं से मिल जाती हैं। बाकी देहरादून, मुम्बई, जगदलपुर और भोपाल समेत अन्य स्थानों से मंगाई जाती हैं।

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