ग्वालियर. जहां शहर की आबादी का एक बड़ा हिस्सा शुद्ध पेयजल की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा है, वहीं लाखों लीटर यही पानी लीकेज दुरुस्त न होने के कारण रोजाना बेकार बह रहा है। निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 35 फीसदी शुद्ध पेयजल लाइनों से ही व्यर्थ निकल जाता है।
प्रोजेक्ट उदय के मैनेजर केके श्रीवास्तव ने पीएचई के कार्यपालन यंत्री खंड क्रमांक दो को लिखे पत्र में उल्लेख किया था कि वाटर सप्लाई लाइनों पर लगाए गए बल्क मीटर की रीडिंग के अनुसार लगभग 35 फीसदी शुद्ध पेयजल का ह्रास हो रहा है। मोतीझील प्लांट से उपनगर ग्वालियर और मुरार क्षेत्र में जाने वाली पांच सप्लाई लाइनों पर लगे बल्क मीटरों की रीडिंग का अध्ययन आठ अप्रैल को दोपहर एक से तीन बजे तक किए जाने पर इसका खुलासा हुआ। इनमें सर्वाधिक लीकेज हड्डी मिल से चार शहर के नाके तक बताया गया।
वाटर ऑडीटिंग अधर में : महानगर में पेयजल व्यवस्था को सुचारु रूप प्रदान करने के लिए प्रोजेक्ट उदय के तहत एशियन विकास बैंक की लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपए की राशि से काम कराया जा रहा है। इस कार्य की शुरुआती शर्त वाटर ऑडिटिंग की थी। निगम के दावे के अनुसार प्रोजेक्ट उदय का काम लगभग समाप्त होने वाला है तथा लीकेज डिटेक्शन मशीन भी आ गई है, लेकिन लीकेज को तलाशने और उन्हें दुरुस्त करने के काम में अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है।
बल्क मीटर की रीडिंग पर सवाल: निगम परिषद में समय-समय पर बल्क मीटरों की उपयोगिता और उनकी रीडिंग को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। एक करोड़ 19 लाख रुपए की लागत से लगाए गए बल्क मीटरों की रीडिंग के अनुसार टंकी भरने वाली लाइनों से 35 फीसदी पानी का ह्रास हो रहा है। सात माह पूर्व बल्क मीटरों की रीडिंग के आधार पर किए गए इस खुलासे के बाद भी लीकेज दुरुस्त करने का काम पूरा नहीं हो पाया है।
नहीं आए टेंडर : प्रोजेक्ट उदय के तहत तैयार किए गए पैकेज क्रमांक तीन में जमीन के अंदर पानी की लाइनों में से लीकेज तलाशने और उन्हें मरम्मत करने के काम का एक करोड़ 15 लाख रुपए का टेंडर किया गया। दरें अधिक आने से प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया।
दूसरी बार टेंडर आमंत्रित करने के बाद ठेकेदार से समझौता वार्ता का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। तीसरी बार में एस्टीमेट रिवाइज कर काम की लागत 2 करोड़ 46 लाख कर दी गई। इसके बाद से मामला डम्प पड़ा हुआ है।
निगम कर्मी ही सुधारेंगे लीकेज: निगम प्रशासन ने लीकेज तलाशने और उन्हें सुधारने के लिए अब निगम कर्मियों को ही प्रशिक्षण देने का मन बनाया है। इसके लिए नॉयस कोरिलेटर इक्विपमेंट मशीन खरीदी गई है। कंपनी के तकनीकी स्टाफ ने कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया है। निगम ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं।