कैनबरा. वैज्ञानिकों के मुताबिक खराब मूड हमेशा बुरा नहीं होता। उनकी मानें तो नकारात्मक भावनाएं बेहतर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाती हैं और इससे याददाश्त भी अच्छी होती है। एक हालिया शोध में यह भी खुलासा हुआ है कि खराब मूड व्यक्ति की सोच को काफी हद तक स्पष्ट कर देता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के प्रो, जोसेफ फोर्गेस के मुताबिक खराब मूड में व्यक्ति न सिर्फ आलोचक के रूप में उभरता है बल्कि वह अपने आप-पास ज्यादा ध्यान दे पाता है। इस समय ही उन्हें अहसास होता है कि किस पर विश्वास करना चाहिए और किस पर नहीं। हालांकि अच्छा मूड रचनात्मकता, लचीलापन, भरोसे तथ बाहरी दुनिया पर ज्यादा ध्यान देने की ओर प्रेरित करता है।
प्रो. फोर्गेस के मुताबिक अध्ययन में साबित हुआ है कि खराब मूड तुलनात्मक रूप से हमें मौजूदा स्थितियों को समझने तथा उसी हिसाब से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। अध्ययन के दौरान उन्होंने खराब व अच्छे मूड के प्रभाव जानने के लिए प्रतिभागियों को न सिर्फ अलग-अलग फिल्में दिखाईं बल्कि उनके जीवन में घटी अच्छी या बुरी घटनाओं को याद करने के लिए कहा गया।
जब बात शहर को लेकर गलत धारणाओं व अफवाहों की आई तो प्रतिभागियों ने माना कि खराब मूड के दौरान वे ऐसी बातों पर कम विश्वास करते हैं। इस अध्ययन की रिपोर्ट ऑस्ट्रेलियन साइंस जर्नल में प्रकाशित की गई है।