हाल ही में मुंबई के निकट ठाणो में एक भयानक दुर्घटना घटी। दीवाली की मध्यरात्रि एक बहुमंजिला इमारत में आग लग गई। सूचना मिलने पर तकरीबन 30 दमकलकर्मी तुरंत वहां पहुंचे। आग चौथे माले पर लगी थी। उनमें से छह दमकलकर्मियों ने ऊपर जाने के लिए लिफ्ट का सहारा लिया, लेकिनवहां पहुंचने से पहले ही उनका लिफ्ट में भरे धुंए से दम घुट गया और उनकी मौत हो गई।
हर जगह यह खबर आग की तरह फैल गई। मैं भी ठाणो गया और हादसे में मृत लोगों के नाते-रिश्तेदारों से मिला। वहां मौजूद लोगों की भीड़ में एसएम मोकाशी नामक एक शख्स भी था। वह न तो किसी मृतक का रिश्तेदार था और न ही दमकलकर्मी या जांच के लिए नियुक्त कोई शासकीय अधिकारी। लेकिन इस हादसे से प्रभावित परिवार के सदस्य समेत वहां मौजूद हर कोई उससे बात कर रहा था।
मुझे भी उसके बारे में जिज्ञासा हुई। मैंने अपना परिचय देते हुए उससे जानना चाहा कि वह किस पेशे से जुड़ा है और दुर्घटनास्थल पर क्या कर रहा है। मुझे पता चला कि वह एक जीवन बीमा एजैंट है और वहां मौजूद प्रत्येक दमकलकर्मी उसे जानता था। यही नहीं, उस उपनगरीय इलाके में काम करने वाले सभी 250 दमकलकर्मियों ने सिर्फ उसी से पॉलिसी ले रखी थी। मोकाशी न सिर्फ पॉलिसी लेने वाले अपने पहले ग्राहक को जानता है, बल्कि आज भी उसे निवेश संबंधी योजनाओं के बारे में जानकारी देता रहता है।
मोकाशी के तकरीबन 6000 ग्राहक हैं और उन सबके लिए वह एक गाइड, फिलॉस्फर व मित्र है। वह जीवन बीमा समेत और भी कई निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के बारे में सलाह देता है। इससे मोकाशी और उसके ग्राहक, दोनों को फायदा होता है। उसके इन 6000 ग्राहकों में से 2500 ठाणो म्युनिसिपल कॉपरेरेशन के कर्मचारी हैं। उन सबके लिए वह किसी देवदूत से बढ़कर है।
वे मोकाशी से राय लिए बगैर अपना एक भी पैसा कहीं निवेश नहीं करते। वहां मौजूद एक दमकल अधिकारी ने कहा, ‘उसने इनके बीच जिस तरह का भरोसा कायम किया है, हम उसके कायल हैं।’
फंडा यह है कि..
दूसरों का भरोसा जीतना कोई एक दिन की बात नहीं है। यह तो लंबे समय तक इमानदारी से किए गए अथक प्रयासों का नतीजा होता है।