कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र उत्सव-गीता जयंती समारोह अब मात्र गीता जन्मोत्सव नहीं रहा। दस बरस पहले इस उत्सव ने अपनी छाप छोड़नी शुरू की। कुछ ही सालों में इसने राष्ट्रीय उत्सव का दर्जा पा लिया। लेकिन यह दर्जा बरकरार नहीं रहा।
हर साल इसमें लाखों पर्यटक और श्रद्धालु शिरकत करते हैं। अब उत्सव के दर्जे को लेकर अजीब स्थिति बनी है। इस उत्सव में राष्ट्रस्तरीय योगदान रहता है। शिल्प मेला राष्ट्रीय स्तर का होता है। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय के अधीन नार्थ जोन कल्चरल सेंट्रर पटियाला शिल्प मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
इन सबके बावजूद इसे राष्ट्रीय उत्सव का दर्जा नहीं मिल सका। प्रदेश सरकार ने इसे राज्यस्तर का दर्जा तो दिया है, लेकिन इतने बड़े आयोजन में प्रदेश सरकार की भूमिका भी नगण्य रहती है। केडीबी, एनजेडसीसी और केयू के जिम्मे मुख्य आयोजन होते हैं, प्रदेश सरकार की तरफ से स्थानीय प्रशासन और टूरिज्म भागीदारी करता है। इसे राष्ट्र स्तरीय दर्जा ना देने पर धर्मनगरी वासियों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों में खासा रोष है।
मिला था राष्ट्रीय दर्जा
कुरुक्षेत्र उत्सव-गीता जयंती समारोह को सन 2002 मे राष्ट्रीय स्तरीय घोषित कर भव्य स्तर पर मनाया गया। देशभर के चुनिंदा शिल्पकारों ने क्राफ्ट मेले में शिरकत की। देशभर की विभिन्न संस्कृतियों को समेटे समरमंथन जैसे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें विश्व प्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत व लालकृष्ण आडवानी, जगमोहन जैसी हस्तियां शामिल हुई थी, लेकिन सन 2005 के बाद वह दर्जा घटता चला गया।
दर्जा घटने से हो रहा नुकसान
पर्यटन जानकारों का मानना है कि इसका दर्जा घटने से धर्मनगरी को नुकसान हो रहा है। इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ रहा है। मद्द संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंदीप गोल्डी, उपाध्यक्षा अंजू छाबड़ा, सक्रिय सदस्य राजेश्वर गोयल, पर्यटक कर्ण कुमार, कुरुक्षेत्र व्यापार मंडल के अध्यक्ष फतेहचंद गांधी, दिनेश कुमार आदि का कहना है कि यह मेला कुरुक्षेत्र की पहचान है। केडीबी सदस्य जयनारायण का कहना है कि इस दिशा में सकारात्मक प्रयास होने चाहिए।
मीटिंग में उठाएंगे इस मुद्दे को
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य एवं कांग्रेस के संगठन सचिव परीक्षित मदान का कहना है कि केडीबी की चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में वे इस मुद्दे को उठाएंगे। अधिकतर सदस्य यही चाहते हैं कि इसको राष्ट्रस्तर का दर्जा मिले।
ऐसे में इसे बढ़ाया जाना चाहिए, ना की इसका दर्जा घटाया जाए। 15 दिन चलने वाले इस उत्सव में देशभर के अलावा विदेशों से भी खासे पर्यटक पहुंचते हैं। जिससे कुरुक्षेत्र के पर्यटन कारोबार को संबल मिलता है।
राज्यस्तर का मिला है दर्जा
केडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरके सिंह का कहना है कि इस उत्सव का दर्जा बेशक राज्यस्तरीय है, लेकिन इसमें शिल्पी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देशभर के कलाकार पहुंचते हैं। लिहाजा इसकी पहचान राष्ट्रस्तर पर है।
केडीबी इसका दर्जा बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इस बार यह उत्सव 13 नवंबर से शुरू होगा। 13 नवंबर शिल्प मेला शुरू होकर 28 नवंबर तक चलेगा। गीता जयंती का शुभारंभ 24 नवंबर से होगा। बता दें कि हर वर्ष कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह की शुरुआत शिल्पमेले से होती है।
भव्यता रहेगी बरकरार
उत्सव में केंद्र व राज्य सरकार दोनों की भागीदारी रहती है। जिला प्रशासन का इस बार भी यही प्रयास रहेगा कि उत्सव भव्य स्तर पर बने और इसकी पहचान और पुख्ता हो। हालांकि इसका दर्जे को बढ़ाने का निर्णय सरकार ही ले सकती है। - पंकज अग्रवाल,उपायुक्त, कुरुक्षेत्र।