जरदारी के ताज को खतरा
Agency Wednesday, November 04, 2009 01:55 [IST]  

वाशिंगटन. पाकिस्तानी सेना राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को लोकतांत्रिक व राजनीतिक माध्यम से अपदस्थ करने की साजिश रच रही है। उसे डर है कि अमेरिका के दबाव में कहीं जरदारी सेना को नागरिक सरकार के नियंत्रण में न ले आएं।



यह आशंका खुफिया मामलों के एक प्रमुख अमेरिकी विचार समूह स्ट्रैटफोर ने जताई है। समूह के अनुसार पाकिस्तानी सेना को यह डर भी सता रहा है कि अगले वर्ष अक्टूबर में सेना के कई शीर्ष जनरलों के रिटायर होने के बाद जरदारी अपने मन-मुताबिक सेना अधिकारियों की नियुक्ति कर सकते हैं।



स्ट्रैटफोर के अनुसार, देश में तालिबान के सिर उठाने और विरोधी ताकतों के मजबूत होने से जरदारी की स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन के प्रति झुकाव रखने के कारण उनकी स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।



समूह ने यह भी कहा है कि घरेलू हालात और अमेरिका के दबाव की वजह से पाक सेना देश की लोकतांत्रिक सरकार का तख्ता पलटने की ताकत नहीं रखती। ऐसे में वह राष्ट्रपति के खिलाफ ताकतों को एकजुट करने में मदद दे रही है, ताकि उन्हें पद से हटने पर मजबूर किया जा सके।



कौड़ियों के भाव जमीन खरीदने का आरोप



इस्लामाबाद. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी विवादों के भंवर में फंसते जा रहे हैं। अब उनके और बेटे बिलावल की कंपनी पर दो अरब रुपए की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदने के आरोप लगे हैं।



मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति ने इस साल मार्च में इस्लामाबाद में तीन सौ सात एकड़ जमीन खरीदी है। कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस जमीन की कीमत दो अरब रुपए आंकी है, जबकि राष्ट्रपति की कंपनी ने यह जमीन महज छह करोड़ बीस लाख रुपए में खरीदी। हालांकि यह सौदा 1997 में किया था गया था, लेकिन 15 साल बाद यह अमल में आया है। दैनिक न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पार्क लेन इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम से यह सौदा किया गया है।



कंपनी में एक लाख बीस हजार शेयर है। इनमें आसिफ अली जरदारी और उनके बेटे बिलावल के तीस-तीस हजार शेयर हैं। रिपोर्ट में जरदारी को कंपनी का निदेशक और बिलाबल को चार अन्य के साथ सदस्य बताया गया है। ये सदस्य डिबेंचरधारक भी हैं।



राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा है कि ऐसे मामले उनकी छवि खराब करने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सौदे को लेकर 1997 में जरदारी के खिलाफ मामला शुरू किया गया था, लेकिन सबूतों की कमी के कारण मामले को बंद कर दिया गया। उन्होंने जरदारी के कंपनी का निदेशक होने और उनके बेटे के सदस्य होने के संबंध में अनभिज्ञता जताई।

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