पुलिस ने पीड़ित को लोहे की बेड़ियों से बांधा
ओपी.वशिष्ठ Wednesday, November 04, 2009 01:50 [IST]  

रोहतक. पत्नी और बेटे के वियोग में गगन भारद्वाज दो साल से न्याय के लिए तड़प रहा है। इसी से हताश होकर सोमवार देर रात उसने सिविल लाइन थाने में जहर खाकर जान देने का प्रयास किया। इससे पहले भी प्रशासन को आत्मदाह की चेतावनी दे चुका है।



पुलिस भी उसको प्रताड़ित करने की कसर नहीं छोड़ रही है। पीजीआई में जिंदगी और मौत के बीच जुझ रहे गगन को पुलिस ने बेड पर लोहे की बेड़ियों से जकड़ रखा है। पीजीआई में उपचाराधीन गगन ने पत्रकारों को आपबीती सुनाई। उसने बताया कि वह मूल रूप से पंजाब के अमृतसर निवासी है।



उसकी शादी रोहतक निवासी अमिता शर्मा के साथ हुई। वैवाहिक जीवन खुशी के साथ व्यतीत हो रहा था, लेकिन अचानक तीन साल पहले एक ऐसा झोंका आया, जो सारी खुशियां उड़ा ले गया। ससुराल पक्ष वालों ने उसके साथ झगड़ा शुरू कर दिया और अमिता को अपने साथ ले गए।



अमिता के साथ ही उसके सात वर्षीय बेटा देव को अलग कर दिया। हांलाकि अमिता उसके साथ रहना चाहती थी और उसने अपने मायके वालों पर प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए। ससुराल पक्ष वालों ने जबरदस्ती कोर्ट में तलाक को केस डलवा दिया। 15 अगस्त 2008 को वह कोर्ट में पेशी पर आया था।



उस दौरान शहर थाना के प्रभारी पवन कुमार थे। उन्होंने उसकी शिकायत नहीं सुनी और अमिता से नहीं मिलने दिया। इसी से क्षुब्ध होकर उसने कोर्ट में जहर खाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन उसे पीजीआई में दाखिल कर बचा लिया गया। पुलिस कर्मियों ने अमिता से नहीं मिलने दिया, जिसके कारण उसका घर बर्बाद हो गया।



इसके बाद उसने पुलिस के आलाधिकारियों को गुहार लगाई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। डेढ़ साल से वह न्याय के लिए भटक रहा है। 21 अक्टूबर को उसने एसएसपी के मोबाइल पर कॉल कर पत्नी और बेटे से मिलाने की गुहार लगाई थी, लेकिन उसके खिलाफ धमकी देने का केस दर्ज कर दिया। जब कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो उसने अपनी आवाज अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एसएसपी आवास के बाहर आत्मदाह की धमकी दी।



मानसिक रूप से परेशान गगन कुछ भी कदम उठा सकता है। लोहे की बेड़ियां बंधने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। - रमेश कुमार, इंस्पेक्टर, सिविल लाइन थाना, रोहतक

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