उज्जैन. कम्प्यूटर के जमाने में उनकी अंगुलियां गजब का कमाल दिखाती हैं। चंद मिनटों में वे ऐसी पेंटिंग तैयार कर देते हैं कि देखने वाला भी दंग रह जाता है। खास बात यह है कि इसमें ब्रश का कतई उपयोग नहीं होता।
हम बात कर रहे हैं दुनिया के संभवत: पहले ऐसे चित्रकार इफ्तेखार अहमद राजा की जो महज चार अंगुलियों से कमाल की पेंटिंग करते हैं। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव निवासी इफ्तेखार ब्रश का उपयोग किए बिना हाथों की अंगुलियों से प्राकृतिक दृश्य, कलात्मक चित्रकारी और खूबसूरत फूल इस खूबी से बनाते हैं कि देखने वाला उनकी महारत का कायल हुए बिना नहीं रहता।
छोटी पेंटिंग (एक बाय एक या दो बाय दो) वे 3 से 5 मिनट और बड़ी पेंटिंग (२क् बाय २४) को वे १५ से २क् मिनट में बना देते हैं। कम्प्यूटर पर भी इतनी तेजी से इतनी सुंदर चित्रकारी संभव नहीं है। बकौल इफ्तेखार यूं तो अंगुली और नाखून से कई लोग चित्रकारी करते हैं लेकिन ब्रश की तरह स्पष्ट आकृतियां बनाने वाला विश्व में कोई चित्रकार नहीं है।
उनकी बनाई पेंटिंग ३क् रुपए से लेकर ५क् हजार रुपए में बिकती हैं। अखिल भारतीय कालिदास समारोह के तहत कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन में आयोजित हस्तशिल्प मेले में वे अपने हुनर से लोगों की दाद बटोर रहे हैं।
गणोशजी के कायल इफ्तेखार: 54 वर्षीय इफ्तेखार अब तक ५क् हजार से अधिक पेंटिंग अंगुलियों की जादूगरी से बना चुके हैं। इनमें सबसे अधिक गणोशजी केचित्र हैं। गणोशजी के चित्र को वे कई रूपों में आकार देते हैं। लोग भी इन्हें पसंद करते हैं। देवी दुर्गा का ८ बाय ६ फीट का विशाल चित्र उन्होंने एक ग्राहक की खास फरमाइश पर तैयार किया था। जिसके लिए उन्हें ५क् हजार रुपए मिले थे।
ऐसे हुई शुरुआत: 35 साल पहले इफ्तेखार ब्रश से पेंटिंग करते थे। एक दिन एक होटल में रंगरोगन हो रहा था। वे वहीं थे, जमीन पर बिखरे रंग को उन्होंने अंगुली से उठाया और उससे चित्रकारी की। इसके बाद तो उन पर जैसे जुनून सवार हो गया। मेहनत रंग लाई और आज वे दुनिया के ऐसे चित्रकार बन गए हैं जो चार अंगुलियों से बेहतरीन चित्रकारी करते हैं।
इसे कहते हैं गॉड गिफ्ट
इफ्तेखार का हुनर गॉड गिफ्ट है। अंगुलियों से इतनी सुंदर चित्रकारी करना आसान नहीं है। लगन, कड़ी मेहनत, लगातार अभ्यास और ईश्वर की कृपा होने पर ही यह संभव है।
अजातशत्रु श्रीवास्तव, कलेक्टर