जयपुर. सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित आईओसी के डिपो में लगी भीषण आग के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह विस्तार से बताए कि तेल डिपो के हादसे को रोकने के लिए सरकार ने क्या उपाय किया और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए सरकार की क्या योजना है। यह भी बताने को कहा गया है कि तेल डिपो के आसपास निर्माण कैसे हो गए।
यह अंतरिम आदेश मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला एवं न्यायाधीश मुनीश्वरनाथ भंडारी की खंडपीठ ने तेल डिपो में आग बुझाने में सरकार के नाकामी को लेकर अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए दिया। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आगामी सुनवाई पर यह बताए कि हादसे में जो घायल हुए हैं उनके लिए एवं मृतकों व उनके परिजनों के लिए क्या किया?
हादसे से प्रभावित गरीबों एवं उद्योगकर्मियों के लिए राहत के लिए क्या किया जा रहा है और आग से हुए पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। मामले की आगामी सुनवाई 9 नवंबर हो होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता जी.एस.बापना पेश हुए। उन्होंने खंडपीठ को बताया कि जिला कलेक्टर को घटना की सूचना गुरुवार को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर मिल गई थी और वे करीब साढ़े सात बजे वहां पर पहुंच गए। रास्ते में ही उन्होंने पुलिस, फायर ब्रिगेड, अस्पताल एवं ट्रैफिक पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिया था। ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया कि वे यातायात को चाकसू एवं सांगानेर में रोकें। महाधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो—दो लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों एक—एक लाख रुपए एवं सामान्य घायलों को पचास-पचास हजार रुपए दिए हैं।
राज्य सरकार की ओर से इसके पेटे कुल तीस लाख रुपए वितरित किए जा चुके हैं। राज्य सरकार की एक टीम दिल्ली गई हुई है ताकि केन्द्र सरकार व आईओसी से क्षेत्र के उद्यमियों को अधिक से अधिक राहत दिलवाई जा सके। आग बुझाने के प्रयासों की जानकारी देते हुए महाधिवक्ता ने बताया कि इसके लिए विशेषज्ञों की राय ली गई थी। उन्होंने कहा कि आग बुझाने के प्रयासों से मामला और भी गंभीर हो सकता है, आग को अपने आप ही बुझने दिया जाए।
इस पर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 9 नवंबर तय करते हुए राज्य सरकार से भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की योजना, विस्थापितों के पुनर्वास की योजना, मृतकों व घायलों के मुआवजे सहित पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय के संबंध में जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि याचिका में आईओसी के तेल डिपो में आग को बुझाने में सरकार के विफल रहने को चुनौती दी गई। इसमें कहा कि आग बुझाने के लिए सरकार ने कोई ठोस कदम नहंीं उठाया, जिससे जान व माल की भारी हानि हुई है। सरकार केवल मूकदर्शक बनकर रह गई और ज्यादा तबाही होने का इंतजार करती रही। डिपो में लगी आग दमकल से नहीं बुझ सकती, बल्कि वायु माध्यम ही इसे बुझाने का जरिया है। कुवैत में जब तेल के कुओं में आग लगी थी तो वहां की सरकार ने चंद घंटों में ही उस पर काबू पा लिया था। ऐसी आग को बुझाने के लिए कुवैत की मदद ली जा सकती है।
पीआईएल से पहले शोध जरूरी : खंडपीठ ने कहा कि पांच पैराग्राफ की पीआईएल दायर की गई है जिसकी अपेक्षा एक विधि ज्ञाता अधिवक्ता से नहीं की जा सकती। बार सदस्य एक एडवोकेट को शोध करके पीआईएल दायर करनी चाहिए। यह बार और बैंच दोनों के लिए अच्छा होगा। चूंकि मामला गंभीर है और पीआईएल के तकनीकी पहलुओं पर जाने की बजाय कुछ बिन्दुओं पर सरकार से जवाब-तलब किया है।
पुलिस ने माना : हादसे के पीछे आईओसी की गंभीर लापरवाही
नसं. जयपुर x पुलिस की प्राथमिक जांच में आईओसीएल डिपो हादसे में आईओसी के अधिकारियों की भयंकर लापरवाही सामने आई है। 11 जनों की मौत और 250 लोगों को घायल करने वाले इस अगिAकांड के बाद जीनस ओवरसीज लिमिटेड की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर शहर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
आईजी जयपुर रेंज बीएल सोनी के अनुसार आईओसी के अधिकारियों ने समय रहते पुलिस व प्रशासन को डिपो में लीकेज की सूचना नहीं दी। यदि सूचना समय पर मिल जाती तो संभवतया इस हादसे को रोका जा सकता था। लीकेज रोका भी नहीं जाता तो कम से कम डिपो परिसर और आसपास के इलाके को खाली करवाकर जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने कहा कि जांच में सभी पहलुओं को बारीकी से देखा जा रहा है। इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सोनी ने बताया कि पुलिस इस हादसे की चार बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। क्या आईओसी स्टॉफ लीकेज रोकने में फेल रहा?, आईओसी ने पुलिस को समय पर सूचना क्यों नहीं दी? क्या सूचना समय पर मिलने के बाद वक्त पर परिसर खाली करने से जाने बच सकती थीं? आईओसी के पास मजबूत आपदा प्रबंधन था या नहीं?
40 मिनट तक लीकेज होता रहा, फिर मिली पुलिस को सूचना
एसपी ईस्ट बीजू जार्ज जोसफ ने बताया कि मुझे आईओसी की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली। पहला फोन कलेक्टर साहब का आया तब तक 40 मिनट तक लीकेज हो चुका था। यदि कंपनी अधिकारी समय पर सूचना दे देते तो हम लोगों की जान बचा लेते। न तो मौके पर भगदड़ होती और न ही इतने लोग घायल होते। लीकेज शाम 6:20 के आसपास शुरू हुआ था और मुझे सूचना लगभग 7 बजे मिली। समय पर सूचना मिलती तो हम आसपास के इलाके में गाड़ियों का सायरन बजाकर लोगों को दूर कर देते।मौका देखने के बाद, एक माह में सामने आ जाएगी सच्चई—एसपी
जोसफ ने दावा किया है कि आग बुझने के बाद वे डिपो का पूरी तरह से मौका निरीक्षण कर लेंगे, उसके ठीक एक माह में जांच पूरी करके सारी सच्चाई सामने ला दी जाएगी। एक माह भी इसलिए क्योंकि इसमें कई तकनीकी पहलु हैं जिसमें ज्यादा सतर्कता और समय की जरूरत पड़ेगी।
50 करोड़ की राहत
करीब 1000 करोड़ रु. के नुकसान से आहत सीतापुरा क्षेत्र के उद्योगपतियों को केंद्र ने 50 करोड़ की अंतरिम राहत देने की घोषणा कर दी है।