चंडीगढ़. हरियाणा में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले पूर्व वन राज्य मंत्री किरण चौधरी को घेरने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बड़े बेटे रणबीर महेन्द्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि उन्होंने बाढ़ड़ा क्षेत्र से अपनी हार के लिए किरण को जिम्मेदार ठहराया है।
उल्लेखनीय है कि महेन्द्रा रिश्ते में किरण चौधरी के जेठ हैं और बंसीलाल के निधन के बाद से उनके रिश्तों में खटास और बढ़ी है। हालांकि, महेन्द्रा ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कोई बात नहीं की है, लेकिन समझा जा रहा है कि वे किरण चौधरी के खिलाफ पार्टी अध्यक्ष को शिकायत का पुलिंदा थमा आए हैं।
महेन्द्रा से पहले बंसीलाल के दामाद सोमवीर सिंह भी लोहारू से अपनी हार के लिए किरण चौधरी व उनकी बेटी श्रुति चौधरी को ही जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। ऐसे ही आरोपों के साथ इस कड़ी को आगे बढ़ाया था भिवानी से विधायक रहे डॉ. शिवशंकर भारद्वाज ने। इस लड़ाई में अब महेन्द्रा भी शामिल हो गए हैं।
भितरघात की वजह से कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिलने के बारे में मुख्यमंत्री हुड्डा व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष फूलचंद मुलाना भी अपने नजरिए से पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी पृथ्वीराज चव्हाण को अवगत करवा चुके हैं। चव्हाण के बुलावे पर हुड्डा व मुलाना ने उनसे दिल्ली में मुलाकात की थी। चव्हाण इस मसले पर अपनी रिपोर्ट अब पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को देंगे।
लड़ाई आगे बढ़ेगी अभी
आने वाले दिनों में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के आगे बढ़ने के आसार हैं। हुड्डा विरोधी खेमे में शामिल बीरेन्द्र चुनाव हार चुके हैं, इसलिए उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की राह बंद हो गई है, जबकि किरण के मंत्री बनने का रास्ता रोकने के प्रयास जारी हैं। हुड्डा विरोधी गुट को खुश करने के लिए बीरेन्द्र को राष्ट्रीय स्तर पर कोई पद दिया जा सकता है। केन्द्रीय मंत्री सैलजा और सांसद राव इन्द्रजीत सिंह की हुड्डा खेमे के खिलाफ क्या व्यूह रचना होगी, यह अभी साफ होना है। इस बीच सीएम मंगलवार शाम को प्रधानमंत्री के साथ ही चंडीगढ़ से दिल्ली रवाना हो गए।
इस्तीफा देना चाहिए मुलाना को
पूर्व मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने कहा है कि कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में 67 सीटें मिली थीं, लेकिन मुलाना के नेतृत्व में इस बार पार्टी 40 सीटों पर आ कर ठहर गई। इसके लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुलाना को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
सोनिया के कहने पर छोड़ देंगे पद
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मुलाना का कहना है, उन्हें सोनिया गांधी ने पार्टी प्रधान बनाया था। अगर वे कहेंगी तो तुरंत पद छोड़ देंगे। बीरेन्द्र सिंह के बयान की तरफ ध्यान दिलाने पर उन्होंने कहा कि अगर उनके इस्तीफे से कांग्रेस की सीटें बढ़ती हों तो उन्हें इस्तीफा देने में कोई ऐतराज नहीं है।