Chandigarh
पोस्टमार्टम को लेकर हंगामा
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 03:21 [IST]  

चंडीगढ़. सुमित प्रकाश के परिजन देर रात तक पीजीआई सहित चंडीगढ़ प्रशासन की भी मिन्नतें करते रहे कि सुमित का शव पोस्टमॉर्टम के बगैर उन्हें सौंप दिया जाए ताकि वक्त पर उसका अंतिम संस्कार किया जा सके। रात करीब 11 बजे तक परिजन पीजीआई पुलिस पोस्ट पर डटे हुए थे।



डीएसपी जगबीर सिंह ने उन्हें बताया कि पोस्टमॉर्टम के बगैर शव उन्हें नहीं सौंपा जा सकता। पुलिस का यह भी कहना था कि इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जांच के लिए कहा गया है सो यह पता लगाया जाना जरूरी है कि मौत की वजह क्या थी और किस वक्त मौत हुई। यह तभी संभव है जब शव का पोस्टमॉर्टम किया जाए।



इससे पहले एडीसी पीएस शेरगिल भी पीजीआई पहुंचे और उन्होंने भी परिजनों से बात की। जब वे पोस्टमॉर्टम के बगैर ही शव ले जाने की बात पर अड़े रहे तो शेरगिल पुलिस को आदेश दे आए कि अगर पुलिस चाहे तो सुमित का शव परिजनों को सौंप सकती है।



सुमित के भतीजे नीरज वर्मा का कहना है,‘हमें जानबूझा कर परेशान किया जा रहा है। दोपहर को हमें अस्पताल के भीतर नहीं जाने दिया गया और जब यह शोर मचा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई है तो हमें फिर से निशाना बनाया गया।’ वे आगे बताते हैं,‘दोपहर से हमें बार-बार यह कहा गया कि दस मिनट में पोस्टमॉर्टम हो जाएगा, लेकिन आधी रात को हमें यह बताया गया कि अब पोस्टमॉर्टम सुबह होगा।’



मेन गेट कर दिया था बंद



पीजीआई प्रशासन इस बात से इनकार कर रहा है कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान मेन गेट बंद किया गया था जबकि वहां मौजूद लोगों का कहना था कि प्रधानमंत्री के आने से पहले यहां किसी को फटकने तक नहीं दिया गया और बाद में भी काफी देर के लिए इसे बंद रखा गया। पीजीआई के ही रेस्ट हाउस में जहां प्रधानमंत्री लंच के लिए आए उसके आसपास भी किसी को नहीं आने जाने दिया गया। सेक्टर 11 के सामने ओपीडी गेट पर भी लोगों को कुछ देर के लिए रोका गया।



यहां तक की एक एंबुलेंस को भी रोके रखा गया। लंबी जद्दोजहद के बाद ही इसे भीतर जाने दिया गया। रोहतक से आए जय भगवान ने बताया कि वे सुबह 4 बजे अपने एक जानकार को यहां लाए थे। उसके दिमाग की नस फट गई थी। दोपहर 12 बजे तक उसका इलाज नहीं किया गया क्योंकि कुछ डॉक्टर प्रधानमंत्री के दौरे में व्यस्त थे।

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