पीएचडी में एडमिशन के लिए यूजीसी की ओर से दी गई गाइडलाइंस इस साल से लागू करने को लेकर राजस्थान यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट्स को अभी तक स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। इस असमंजस के बीच कुछ डिपार्टमेंट्स ने डीआरसी (डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी) की मीटिंग आयोजित कर ली है तो कुछ एकेडमिक काउंसिल के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
यूजीसी की गाइडलाइन्स के अनुसार पीएचडी में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर दिया जाना है, जबकि इस साल के लिए अभी तक ऐसी कोई तारीख तय नहीं हो पाई है। मुद्दा यह है कि अगर इस बार एंट्रेन्स और यूजीसी के नए पैटर्न के बिना पीएचडी में एडमिशन दे दिया गया तो इस बैच के डिग्री होल्डर पीएचडी के आधार पर लैक्चररशिप में नहीं जा पाएंगे। ऐसे में इस साल के बैच से निकलने वाले डिग्री होल्डर इस मुसीबत में आ सकते हैं कि वे पीएचडी के बाद लैक्चररशिप में अपना कॅ रिअर बना पाएंगे या नहीं। यूजीसी के नए पैटर्न पर पीएचडी में एडमिशन का स्वरूप तैयार करने के लिए यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च प्री टेस्ट कमेटी भी बनाई थी।
कमेटी हालांकि अपनी रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन इस रिपोर्ट में अगले साल होने वाले एडमिशन की रूपरेखा से संबंधित सिफारिशें ही हैं। कमेटी की कन्वीनर प्रो. कुसुम जैन ने बताया, उन्होंने अगले वर्ष पीएचडी में होने वाले एडमिशन से संबंधित रूपरेखा और शेड्यूल यूनिवर्सिटी को सौंपा है। उन्होंने बताया कि इस साल पीएचडी में एडमिशन कैसे करने हैं, यह यूनिवर्सिटी ही तय करेगी।
जुलाई में ही आ गई थीं गाइडलाइन
गौरतलब है कि यूजीसी की गाइडलाइन जुलाई में ही आ गई थी। साढ़े तीन महीने से भी ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी अभी तक एडमिशन को लेकर कुछ भी तय नहीं हो सका है। इससे रिसर्च में एडमिशन चाहने वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स अधरझूल में हैं। यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी के अनुसार 14 नवम्बर को होने वाली एकेडमिक काउंसलिंग की मीटिंग में ही तय हो पाएगा कि इस साल पीएचडी में किस तरह एडमिशन हो।
विरोधाभास यह है कि यूजीसी की गाइडलाइन्स के अनुसार जून 2009 के बाद पीएचडी के लिए एंट्रेंस एग्जाम और नए पैटर्न के अनुसार हुए रजिस्ट्रेशन ही मान्य होंगे। जब यूजीसी ने साफ कर ही दिया है तो इस बात के लिए मीटिंग का इंतजार क्यों है कि एडमिशन कैसे हों?
बॉटनी डिपार्टमेंट के प्रो. पीसी त्रिवेदी कहते हैं कि यूजीसी गाइड लाइन्स की स्टडी करने से साफ हो जाता है कि पुराने पैटर्न पर जो भी डीआरसी मीटिंग हो रही हैं, वह गलत हैं, वहीं ईएएफएम डिपार्टमेंट के हैड प्रो. पीके कोटिया कहते हैं, डीआरसी की मीटिंग सितम्बर में होनी प्रस्तावित थी, लेकिन स्थिति साफ होने के इंतजार में वे मीटिंग नहीं करवा सके।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वाइस चांसलर ने डिपार्टमेंट हैड्स को कुछ दिन इंतजार करने के मौखिक निर्देश दिए थे। इसी बीच कुछ डिपार्टमेंट्स ने अपने स्तर पर ही पुराने नियमों को फॉलो करना शुरू कर दिया है। कुछ डिपार्टमेंट्स में पुराने पैटर्न पर डीआरसी की मीटिंग कर ली गई है।
संस्कृत डिपार्टमेंट की एचओडी प्रो. लक्ष्मी शर्मा कहती हैं, अगर पुराने पैटर्न पर ही एडमिशन करने पड़े तो स्टूडेंट्स का समय बच जाएगा और एंट्रेंस टेस्ट का निर्णय हुआ तो इसका पालन किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर बॉटनी डिपार्टमेंट की एचओडी प्रो. राका कमल कहती हैं, अभी डीआरसी मीटिंग को लेकर कोई भी फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन जल्द ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
स्टूडेंट्स का इंतजार बाकी
रिसर्च में एडमिशन चाहने वाले स्टूडेंट्स को अभी कम से कम 15 दिन तो और इंतजार करना ही है। पीएचडी के लिए एक डिपार्टमेंट से अप्लाई करने वाले स्टूडेंट सत्या चौधरी कहते हैं, जब यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब नए पैटर्न से सलेक्ट किए गए स्टूडेंट्स की ही पीएचडी मान्य होगी, तो इस बात का फैसला करने के लिए मीटिंग क्यों बुलाई जा रही है? जब इतने स्टूडेंट्स का भविष्य इससे जुड़ा है तो इस बात का फैसला करने के लिए एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग पहले भी तो बुलाई जा सकती थी।