Chandigarh
कंधे पर रखा हाथ, कहा कैसे हो शेरगिल
अधीर रोहाल Wednesday, November 04, 2009 03:31 [IST]  

चंडीगढ़. ‘..मैंने अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत वक्त यहां गुजारा है। ..मैं यहां यादों की गलियों से गुजर रहा हूं। ..और इस वक्त भावुक हो जाऊं तो मुझे माफ करना..।’ औपचारिक तौर पर यह लफ्ज देश के प्रधानमंत्री के हैं, पर इसमें भावना उस छात्र और शिक्षक की थी जो 44 बरस पहले इसी कैम्पस का हिस्सा थे।



पीयू के लिए डॉ. सिंह एल्यूमनी हैं। प्रधानमंत्री के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी उनका गुरुकुल है। तभी तो वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय पीयू को दे गए। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा, अपने गुरुकुल आना मेरे लिए हमेशा से ही खुशी की बात रही है। डॉ. सिंह ने मंगलवार को करीबन 85 मिनट गुरुकुल में बिताए। उन्होंने पूर्व शिक्षक डॉ. एचएस शेरगिल के कंधे पर हाथ रखा, और पूछा ‘कैसे हो शेरगिल’।



हैलो साथियो



उन्हें पुराने साथी पीयू के पूर्व वीसी प्रो. आरपी बांबा, पूर्व शिक्षक एचएस शेरगिल, हरनाम सिंह और एमएम पुरी जैसे साथी याद आए। जो आयोजन स्थल में मौजूद थे, उनसे मिले भी। हालांकि प्रोटोकोल की वजह से ज्यादातर पुराने साथियों से यह मुलाकात सिर्फ ‘हैलो’ तक ही सीमित रही।



सबकुछ पीयू की देन



प्रधानमंत्री शाम 4.20 बजे तक पीयू मे रहे। उनका ज्यादातर वक्त औपचारिक कार्यक्रम में बीता। उनके भाषण में बीते दिनों की याद ताजा होती रही। वे अपनी उपलब्धियों को पूरा सिला भी पीयू को दे गए। बोले, मैंने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया, वह इस यूनिवर्सिटी की ही वजह से है।



नहीं बदले हैं मनमोहन



वे 2.55 बजे जिम्नेजियम हॉल पहुंचे। यहां डॉ. सिंह अपने दोस्तों से मिले। डॉ. एचएस शेरगिल से मिलने के साथ प्रो. बांबा और प्रो. एमएम पुरी से हैलो हाय की। बाकी शिक्षकों से भी मिले। डॉ. शेरगिल कहते हैं कि डॉ. सिंह भले ही प्रधानमंत्री हैं पर उनके व्यक्तित्व में कुछ नहीं बदला है। डॉ. आरपी बांबा और प्रो. एमएम पुरी कहते हैं कि उनसे बातचीत होती रहती है। डॉ. सिंह आज भी उसी जमीन से जुड़े हैं। यह मुलाकात उन शिक्षकों के लिए भी अहम थी, जिन्होंने डॉ. सिंह से जुड़े किस्से अपने वरिष्ठ साथियों से सुने हैं।

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