जयपुर. दुनिया में नाम कमाने वाले जयपुर फुट (कृत्रिम पैर) के बाद अब जयपुर घुटने का नया आविष्कार विश्व में धूम मचा रहा है। इस घुटने का आविष्कार भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के सहयोग से अमेरिका की प्रसिद्ध स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने किया है।
इसे अमेरिका की टाइम मैगजीन ने नवंबर 2009 के अंक में विश्व के 50 सवरेत्तम आविष्कारों की सूची में शामिल किया है। अमेरिका में जयपुर घुटना के नाम से इसका पैटेंट करा लिया गया है।
मात्र 20 डालर की लागत से बनने वाला कृत्रिम घुटना पूरी तरह एक पैर से निशक्त हो चुके लोगों के जीने का सहारा बन गया है। इसका 400 मरीजों पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। इसके निर्माण से जुड़े डॉ. एन.के. माथुर ने बताया कि जयपुर फुट सिर्फ घुटने से नीचे भाग वाले के लिए लगाया जा सकता था। पूरी तरह कटे हुए पैर वालों को इसका लाभ नहीं मिल पाता था।
समिति के संस्थापक डी.आर. मेहता जब कैलिफोर्निया में पुरस्कार लेने गए थे तब वहां इस कमी को दूर करने के लिए स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से चर्चा हुई थी। उसके बाद जयपुर से इसकी सारी जानकारी, सामान वहां भेजा गया। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंजीनियर जॉयल सेडलर, इरिक थोरसल और जाफर खिरानी ने इसे कंप्यूटर पर डिजाइन कर दो डिवाइस बनाई। उसे परीक्षण के लिए महावीर विकलांग समिति भेजा गया। कुछ कमियों के बाद इसे पूरी तरह लगाने के योग्य पाया गया।
लागत मात्र एक हजार रुपए : जयपुर घुटना का अमेरिका में निर्माण किया जाए तो इसकी लागत ढाई लाख रुपए आती है, जबकि इसका निर्माण भारत में किया जाए तो मात्र एक हजार रुपए की लागत आती है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति ने इसे बड़े स्तर पर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही लोगों को इसका लाभ मिलने लग जाएगा।
असली घुटने की तरह काम
जयपुर घुटना बिल्कुल असली की तरह काम करता है। इसमें वे सारी खूबियां हैं, जो असली घुटने में होती हैं। डॉ. माथुर ने बताया कि इसमें घुटने के पास एक सेल्फ लुब्रिकेंट्स डिवाइस (आटोमैटिक लॉक) लगा रहता है जो खड़े होने पर लॉक हो जाता है जिससे व्यक्ति के गिरने का खतरा नहीं होता। ये पूरी तरह बायोमैकेनिकल डिवाइस है। इसमें तारों का प्रयोग किया है जिससे घुटने को मोड़ने में दिक्कत नहीं आती है।