जाएं तो जाएं कहां
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 03:36 [IST]  

जोधपुर. शहर में ई-मित्र कियोस्क चलाने वाले हैरान हैं कि बार-बार कहने के बावजूद प्रशासन उनकी बात को सुन क्यों नहीं रहा। 2006 में जब योजना शुरू हुई थी तो बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन वे आज तक पूरे नहीं हुए। दावा तो यह भी था कि इन कियोस्कों पर 219 सेवाएं मिलेगी लेकिन हकीकत में पांच-सात सेवाओं से ज्यादा तो कभी शुरू ही नहीं हो पाई।



इसके चलते 60 में से 25 कियोस्क तो बंद हो चुके हैं और बाकी भी अब इनके भरोसे नहीं रहे। मीडिया डवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष राजेंद्र भाटी के अनुसार वे प्रशासन की मीटिंगों में अपनी बात रख चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं कर रहा। विधानसभा चुनावों के दौरान इन कियोस्कों पर मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए जरूरी हार्डवेयर खरीदने का दबाव बनाया गया।



कियोस्कों के मालिकों ने ये हार्डवेयर खरीदे और मतदाता पहचान पत्र बनाने लगे कि चुनावों के बाद यहां मतदाता पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया रोक दी गई। वे हार्डवेयर बेकार हो गए। इसी तरह जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र भी यहीं बनने थे लेकिन वास्तव में यहां केवल फॉर्म जमा हो रहे हैं और आगे की कार्रवाई एकल खिड़की पर होती है।



इसलिए अब लोग इन कियोस्कों पर कम ही आ रहे हैं। जलदाय विभाग ने तो इस योजना के बाद बिल भरने के लिए ठेकों को हटा दिया लेकिन डिस्कॉम में अभी भी ठेके पर बिजली के बिल जमा किए जा रहे हैं। यही नहीं, बिजली के बिल जमा करने पर दिया जाने वाला कमीशन भी कम कर दिया गया है।

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