जोधपुर. राज्य की सरकार एक तरफ तो बड़े जोश-खरोश के साथ हरित राजस्थान का ख्वाब दिखाकर प्रदेश में हरियाली की छटा बिखेर पर्यावरण को बढ़ावा देने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर सालों की मेहनत से तैयार शुष्क कंटीली झाड़ियों के गुलिस्तां को जिला प्रशासन ने बर्बादी का रास्ता दिखा दिया है।
जोधपुर से लगते चोखा, बड़ली व मोकलावास में भारत सरकार की ‘वेस्टलैंड विकास परियोजना’ के तहत तैयार हुए इन जंगलों की भूमि गैर वानिकी कार्यो के हवाले होने से 3 करोड़ 49 लाख 77 हजार की लागत से लगाई इस वन संपदा के वजूद को खतरा पैदा हो गया है। पर्यावरण की दृष्टि से यहां प्रति हैक्टेयर में लगे 200 पौधों के इस गुलिस्तां को आबाद रखने के लिए वन विभाग ने सरकार को पत्र लिखकर वन संपदा को संरक्षित रखने की गुहार की हैं।
वन अमला लगातार प्रशासन के आगे गुहार लगा रहा है कि शुष्क कंटीली झाड़ियों वाले वन विकसित होने के कारण यह क्षेत्र राजस्व दस्तावेजों में वन विभाग के नाम दर्ज किया जाए, मगर इसे अनसुना कर प्रशासन इस भूमि को जेडीए के मार्फत राजस्थान आवासन मंडल को आवंटित करने में लगा है।
केंद्रीय मदद तथा राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से वर्ष 1992 से 1997 के दौरान चोखा, बड़ली व मोकलावास की वेस्टलैंड में वनस्पति व प्राकृतिक पुनत्र्पादन के लिए 2 हजार 374 हैक्टेयर भूमि पर शुष्क कंटीले पौधे लगाए गए थे। इनकी रखवाली के लिए न केवल इस क्षेत्र को पत्थरों की कच्ची दीवार से सुरक्षित किया गया, बल्कि वन अमले के आठ कर्मचारी आज भी इसकी सुरक्षा में लगे हैं।
यहां अवैध कटाई, चराई, खनन, अतिक्रमण, शिकार व आगजनी रोकने में लगे कर्मचारियों पर विभाग अब तक लाखों रुपए खर्च कर चुका है। तत्कालीन कलेक्टर ने फरवरी 2008 में बड़ली के खसरा संख्या 88 की 3366.13 बीघा भूमि में से 2500 बीघा का आवंटन जेडीए को कर दिया। वेस्टलैंड प्रोजेक्ट में पौधरोपण क्षेत्र को वन विभाग के नाम दर्ज किया जाए।
इसके बावजूद दर्ज नहीं होने से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के साथ इन वानिकी कार्यो की तबाही तो तय है ही, सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि लाखों खर्च करने के बाद एक विभाग पौधे लगाता रहेगा और दूसरा उसे उजाड़ने के फरमान सुनाएगा तो वन कैसे बच पाएंगे? एक वनकर्मी का कहना है कि वैसे भी अधिकांश वन खंड़ों में लोगों ने अतिक्रमण करते हुए बस्तियां बसा ली है। ऐसे में जंगल को नहीं बचाया गया तो हरियाली दिखनी मुश्किल हो जाएगी।
सरकार को बताया है
विभाग ने इस बहुमूल्य वन संपदा बचाने के लिए सरकार को अवगत करा दिया है। इस बारे में फिलहाल हमें कोई जवाब नहीं मिला है। - इश्हाक अहमद मुगल, मंडल वन अधिकारी वन विभाग