जोधपुर. राजस्थान हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जिला प्रशासन को आदेश दिए हैं कि शहर के सार्वजनिक मार्गो पर यातायात में बाधक बन रहे धार्मिक स्थल हटाए जाएं। हाईकोर्ट ने 48 घंटे में इन अवरोधकों को चिह्न्ति कर उनसे जुड़े लोगों को नोटिस देकर हटाने को कहा है। न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी ने मंगलवार को यह आदेश दिए। हाईकोर्ट में दिनेश कुमार व शंकर ने बीमा क्लेम संबंधी मामले में अपील प्रस्तुत की थी।
न्यायाधीश कोठारी ने इसकी सुनवाई करते हुए तब स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का संदर्भ देते हुए गत सात अक्टूबर को सिटी एसपी, जेडीए सचिव व नगर निगम सीईओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर यातायात में अवरोधक बन रहे धार्मिक स्थलों के संबंध में प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
इस मामले में मंगलवार को रखी सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कोठारी ने कमेटी को शुरुआत में पांच ऐसे अवरोधक चिह्न्ति कर उन्हें 48 घंटे के नोटिस पर हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आदेश में कहा कि नोटिस के बावजूद ऐसे अवरोधक स्वेच्छा से नहीं हटाए जाते हैं तो उसे बलपूर्वक हटाया जाए। न्यायालय ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि उसके द्वारा तय समय सीमा को राज्य सरकार की कोई भी अथॉरिटी बढ़ा नहीं सके गी।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक स्थल के नए निर्माण नहीं हो। आदेश में कहा गया था कि सरकारें इसकी अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ जिला कलेक्टरों को अपने जिले में ऐसे नए निर्माण आदि की निगरानी करने को कहे ताकि भविष्य में ऐसे निर्माण न हो सके।
देना होगा सबूत
निर्णय में कहा गया है कि 9 नवंबर तक जिला प्रशासन कम से कम पांच अवरोधक चिह्न्ति कर हटाए और उसकी पालना रिपोर्ट मय फोटोग्राफ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
अधीनस्थ न्यायालयों के आदेश स्वत: ही निष्प्रभावी
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण संबंधी अधीनस्थ न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में दिए स्थगन इस आदेश के बाद स्वत: ही निष्प्रभावी माने जाएंगे। इस संबंध में दीवानी व आपराधिक न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों को भी इसी मामले के साथ सुना जाएगा एवं अधीनस्थ न्यायालय अवरोधकों के संबंध में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे।