इंदौर. आईडीए द्वारा स्कीम-133 मुक्त करने के बाद स्कीम में शामिल १३ गृहनिर्माण संस्थाओं के सदस्यों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी। मगर सदस्यों के साथ धोखा करते हुए छह संस्थाओं ने यह जमीन पहले ही किसी और के नाम कर दी है।
आईडीए की इस स्कीम में विकास अपार्टमेंट , जनकल्याण, मेघना, गुडलक, मां सरस्वती, सुकल्या ग्राम, उमंग, विजयश्री, अमृता, इंदौर विकास, प्रशांत, वसंत विहार और पीताम्बरा गृहनिर्माण संस्था की जमीन थी।
ऑडिट में भी घपला
इन 13 संस्थाओं में से अधिकांश का ऑडिट भी पूरा नहीं है। इनमें से गुडलक संस्था ऐसी है जिसका ऑडिट 2000 के बाद हुआ ही नहीं है। संस्था फिलहाल भंग है।
साहब, संस्था व निगम ने धोखा दिया
विकास अपार्टमेंट और वसंतविहार संस्थाओं का 2005-06 से ऑडिट नहीं हुआ है। उमंग, मां पितांबरा, इंदौर विकास, अमृता गृहनिर्माण संस्था का वर्ष २क्क्६-क्७ तक का ऑडिट हो पाया है। इसके अलावा मां सरस्वती, सुकल्या ग्राम, मेघना, जनकल्याण गृहनिर्माण संस्था का 2007-08 का ऑडिट पूरा है। इनमें केवल प्रशांत ऐसी संस्था है जिसका अभी तक का ऑडिट अपडेट है। जिन संस्थाओं का ऑडिट पूरा नहीं है उनके सदस्यों को अपने प्लॉट के लिए कुछ समय का इंतजार करना होगा।
चूंकि ऑडिट की जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए इनमें से कितनी संस्थाओं की जमीन सुरक्षित है और कितनी बिकी है इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। बैठक में संस्था के पदाधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। - महेंद्र दीक्षित उपायुक्त, सहकारिता
इन संस्थाओं ने बेची जमीन
विकास अपार्टमेंट, जनकल्याण, गुडलक, सुकल्या ग्राम, मेघना और अमृता गृहनिर्माण संस्था। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार इन संस्थाओं की या तो पूरी या आंशिक तौर पर जमीन किसी और के नाम पर है।
आज सुनवाई
आईडीए द्वारा मुक्त की गई स्कीम १३३ की जमीन का फायदा संस्थाओं के सदस्यों को किस तरह से दिया जाए, इस पर बुधवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई है। इसमें संस्थाओं के संचालक, आईडीए और सहकारिता विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
मुख्यमंत्री देंगे पीड़ितों को प्लॉट
सुविधा गृहनिर्माण संस्था के सदस्यों को मिलेंगे 52 प्लॉट भू-माफिया के शिकंजे में फंसे गृहनिर्माण संस्थाओं के सदस्यों को जल्दी राहत मिल सकती है। सब कुछ ठीक रहा तो शुक्रवार को इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सुविधा गृहनिर्माण संस्था के 52 सदस्यों को प्लॉट बांटकर करेंगे।
शासन ने एक सड़क समाप्त करने की मंजूरी दी तो 22 और सदस्यों को भी प्लॉट मिल सकेंगे। कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने बताया तकनीकी परेशानी नहीं आई तो मुख्यमंत्री प्लॉट वितरित करेंगे। सुविधा संस्था ने रत्नलोक कॉलोनी विकसित की थी।
इसके 485 सदस्यों में से 165 को प्लॉट दिए जा चुके थे। 118 प्लॉटधारकों ने जमा की हुई राशि वापस ली थी, जबकि 89 डिफाल्टर हो चुके हैं। 113 सदस्यों को प्लॉट दिए जाना है। आईडीए के पास फिलहाल 52 प्लॉट हैं, जिन्हें वह वितरित करने को तैयार है।
कॉलोनी में एक सड़क ऐसी है जिसके निर्माण से ज्यादा फायदा नहीं है। यदि इस सड़क को हटा दिया जाए तो 22 प्लॉट और मिल सकते हैं। कलेक्टर ने बताया कि वह शासन के पास सड़क हटाने का प्रस्ताव भेजेंगे।