पानीपत से नीलोखेड़ी तक 16 फ्लाइओवर
प्रवीन अरोड़ा Wednesday, November 04, 2009 05:18 [IST]  

karnalकरनाल. जीटी रोड पर चलते समय आप रेड लाइट व चौक चौराहों पर ब्रेक लगाने से परेशान हैं, लेकिन दो साल बाद आपकी यह परेशानी नहीं रहेगी, क्योंकि पानीपत से नीलोखेड़ी के बीच पड़ने वाले चौक चौराहों पर फ्लाइओवर बनाए जा रहे हैं।



‘सोमा आईसोलेक्स जेवी’ नामक इस प्रोजेक्ट पर योगराज इंफ्रास्ट्रक्चर लि. नामक कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। पानीपत रिफाइनरी के पास मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं, जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।



ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि दो साल बाद प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद वाहन चालकों को जीटी रोड पर वाहन चलाते समय ब्रेक लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 800 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से न केवल फ्लाइओवर का निर्माण किया जाएगा बल्कि जीटी रोड का विस्तार भी किया जा रहा है।



प्रोजेक्ट पर काम शुरू



पानीपत से नीलोखेड़ी तक 16 फ्लाइओवर बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। फिलहाल पानीपत रिफाइनरी के पास मिट्टी की जांच का कार्य चल रहा है। इसके बाद फ्लाइओवर का काम शुरू कर दिया जाएगा। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए डाइवर्जन भी बनाए जाएंगे। - अशोक मनै, डीपीएम(डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर) योगराज इंफ्रास्ट्रक्चर लि.



पांच मीटर तक होगी ऊंचाई



फ्लाइओवर के दोनों ओर 400-400 मीटर का रैंप बनाया जाएगा, जबकि फ्लाइओवर के बीच का हिस्सा अलग-अलग चौक पर अलग-अलग होगा। अधिकारियों के अनुसार यह हिस्सा 30 से 180 मीटर के बीच रहेगा। इसके अलावा फ्लाइओवर की ऊंचाई करीब पांच मीटर तक रहेगी।



पानीपत रिफाइनरी से शुरू होकर नीलोखेड़ी तक बनने वाले इन फ्लाइओवर के निर्माण कार्य के दौरान लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए जीटी रोड पर डाइवर्जन भी बनाए जाएंगे। एक साइड का डाइवर्जन पांच सौ मीटर तक चौड़ा होगा।



बनाए जाएंगे अंडर पास



प्रोजेक्ट के तहत न केवल जीटी रोड के ऊपर से निकलने के लिए फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं, बल्कि नीचे से गुजरने के लिए भी अंडर पास बनाए जा रह हैं। प्रोजेक्ट में छह अंडर पास बनाए जाएंगे। ताकि लोगों को जीटी रोड क्रास करते समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो। घरौंडा, मधुबन, कमोपुरा के अलावा तीन और अंडर पास बनाए जाएंगे।



दुर्घटनाओं में आएगी कमी



ट्रैफिक एंड हाइवे एआईजी (आईपीएस) डा. राजश्री सिंह ने बताया कि एनएच-वन पर दिल्ली से चंडीगढ़ तक 17 दुर्घटना संभावित क्षेत्र हैं। जिन पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। इन फ्लाइओवर के बनने से दुर्घटनाओं में भी निश्चित तौर पर कमी आएगी।

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