छाया जीरो इयर का संकट
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 05:30 [IST]  

भोपाल. प्रदेश के दस से ज्यादा तकनीकी कॉलेजों को इस सत्र में जीरो इयर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे कॉलेजों में इस बार दस प्रतिशत सीटें भी नही भर परई हैं। सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए कॉलेज संचालकों से छात्रों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव मंगाया जा रहा है।



प्रदेश के कई कॉलेजों में इस बार कुल सीटों के दस प्रतिशत से भी कम छात्रों ने प्रवेश लिया है। दो-तीन कॉलेजों को मात्र एक-दो छात्र ही मिल पाए हैं जबकि कई को पांच-दस छात्रों से ही संतोष करना पड़ा है। इनमें से ज्यादातर इस वर्ष खुले नए कॉलेज हैं, जिनमें चार ब्रांच में 240 सीटों की अनुमति दी गई है। ऐसे कॉलेजों के सामने साल भर कॉलेज संचालित कर पाना ही सबसे बड़ा संकट है।



कई कॉलेजों की हालत तो इतनी खराब है कि अधोसंरचना के लिए कर्ज की किस्त देना तो दूर, प्राचार्र्यो को वेतन देना भी मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में कॉलेज संचालक इक्का-दुक्का प्रवेशित छात्रों को शिफ्ट करने का मन बना रहे हैं। हालांकि प्रवेश नियमों के प्रावधानों की वजह से ऐसा कर पाना फिलहाल संभव नहीं है। लिहाजा सरकार भी इस समस्या को देखते हुए प्रवेश नियमों में संशोधन करने पर विचार कर रही है।



अगले साल की भी दिक्कत



कम प्रवेश की स्थिति को देखते हुए कॉलेजों के सामने अगले साल की मान्यता का संकट भी आ गया है। दरअसल, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से अगले साल की मान्यता लेने के लिए मौजूदा सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए दूसरे वर्ष की जरूरत के हिसाब से संसाधन और शिक्षकों की संख्या बताना जरूरी है। लेकिन ऐसे हालात में गिने चुने छात्रों के लिए संसाधन और शिक्षक बढ़ा पाना असंभव है। जाहिर है कि ऐसे में कॉलेज मौजूदा पाठ्यक्रमों को दूसरे वर्ष नहीं चला सकेंगे। दूसरी ओर, जीरो इयर कर देने से इस सत्र की मान्य सीटों पर अगले वर्ष प्रवेश कर पाना आसान होगा।



दोगुना होगी फीस



ऐसे कॉलेजों के लिए अगले सत्र की फीस तय करना भी फीस कमेटी के लिए मुश्किल हो रहा है, क्योंकि कमेटी के नियमानुसार छात्रों पर किए गए खर्च के अनुसार ही फीस तय की जाती है। छात्रों की कम संख्या होने पर आय-व्यय का संतुलन नही बन पाएगा। कमेटी के विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे में खर्च की राशि अधिक होने से संबंधित कॉलेज की फीस अगले सत्र में दोगुना तक हो सकती है, जो सिद्धांतत: उचित नही होगा।



बीच का रास्ता निकालेगी सरकार



कॉलेजों का संकट देखते हुए प्रवेश कमेटी सरकार को बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दे रही है। इसमें प्रवेश नियमों में संशोधन करके पहले ही सत्र में कॉलेज स्थानांतरित करने की अनुमति दी जा सकती है। अभी प्रवेश नियमों में तीसरे सेमेस्टर में ही कॉलेज परिवर्तित किया जा सकता है।



इसके लिए तीन पार्टी सहमति अर्थात, संबंधित कॉलेज, जिसमें शिफ्ट किया जाना है, वह कॉलेज और संबंधित छात्र की अनुमति से स्थानांतरण करने का प्रस्ताव सरकार को दिया जा रहा है। कमेटी के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि कॉलेजों को संकट से उबारने का यही एक रास्ता नजर आ रहा है। इसके लिए कॉलेजों से प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं।

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