भोपाल. गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं द्वारा किए गए फर्जीवाड़े को सुलझाने के लिए अब सोसायटी और सदस्यों के बीच नए सिरे से एग्रीमेंट किए जाएंगे। यह एग्रीमेंट उन सोसायटियों से कराया जाएगा, जिनके पास भूखंड बचे हैं।
चार माह से चल रही जन सुनवाई के बाद भी गृह निर्माण समितियों के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर मंगलवार को दो-चार नई गृह निर्माण सोसायटियों के नाम शिकायती सूची में जुड़ जाते हैं। इस बार नेताजी गृह निर्माण, जेजे गृह निर्माण, रविदास गृह निर्माण, न्यू अभिषेक गृह निर्माण आदि सोसायटियों के नाम पैसा लेकर भूखंड न देने की शिकायतें की र्गई।
फार्म हाउस मिला नहीं, रकम भी गई
छोला रोड निवासी आशीष सिंघई ने शिकायत की कि ग्राम अरवलिया में उन्होंने महेश वाजपेयी से फार्म हाउस खरीदने का अनुबंध किया था। करीब चार लाख रुपए भी दे दिए थे लेकिन अभी तक न तो फार्म हाउस पर कब्जा दिया गया और न ही रकम लौटाई गई। त्रिलंगा निवासी जुगलकिशोर गुप्ता व कोलार क्षेत्र निवासी एमएन विजय नायर ने रविदास, अनीता पवार ने सर्वधर्म, राना कुरैशी व कस्तूरी श्रीवास्तव ने न्यू अभिषेक, कृष्ण कुमार ने बंजारी, शहाना खान ने जेजे गृह निर्माण, विजय ताम्रकार ने द्वारकापुरी संस्था के खिलाफ शिकायतें कीं।
श्री शुक्ला ने बताया कि जिन संस्थाओं के पास जमीन बची है और वे सदस्यों को भूखंड देने पर राजी हो रहे हैं, उनके संचालकों और सदस्यों के बीच एमओयू के तहत जिला प्रशासन की देखरेख में करारनामे तैयार कराए जाएंगे। जो संस्थाएं पैसा लौटाने को तैयार हैं उनसे भी इस तरह का करार पत्र तैयार कराया जाएगा। इस तरह कुल 54 शिकायतें की र्गई। अधिकांश शिकायतों पर कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए।
35 संस्थाओं पर कसा शिकंजा
उधर, अपर कलेक्टर दीपक सक्सेना की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की सिफारिश पर 35 संस्थाओं के खिलाफ शाहजहांनाबाद व पिपलानी समेत विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज करा कर मामले जिला न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। श्री सक्सेना ने बताया कि भेल संगम व कई अन्य सोसायटियों के संचालकों व सदस्यों को शुक्रवार को रूबरू कराकर बातचीत के जरिए विवाद हल कराने के प्रयास किए जाएंगे।
इमाम-मुअज्जिनों ने की शिकायत
मसाजिद कमेटी के सचिव जहीर कुरैशी ने कमेटी के पूर्व सचिव की शिकायत की। उन्होंने कहा कि पूर्व सचिव ने वेलफेयर फंड के नाम पर इमाम-मुअज्जिनों के वेतन से हर माह पचास-पचास रुपए की राशि काटी, जो करीब छह लाख रुपए है। इसका कमेटी के रिकॉर्ड में कोई हिसाब नहीं है।
मैं कैसे बना उपाध्यक्ष
कबीटपुरा, बुधवारा के खालिद उल हुसैनी ने शिकायत की कि गिजाला शिक्षित बेरोजगार प्राथमिक उपभोक्ता भंडार की गठित समिति में उन्हें निर्वाचित उपाध्यक्ष दर्शाया गया है जबकि मुझे ही इसकी जानकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मेरा इस संस्था से कोई संबंध नहीं है और न ही मैंने इसके किसी चुनाव में भाग लिया। उन्होंने इसकी जांच की मांग की है।