जयपुर. राज्य के मुख्य सचिव टी. श्रीनिवासन बुधवार को पहली पेशी पर विधानसभा में उपस्थित होंगे। विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्रसिंह ने मुख्य सचिव सहित 15 विभागों के प्रमुख सचिवों को भी तलब किया है। इनमें से 5 विभागों के प्रमुख सचिवों की पेशी बुधवार को ही होगी।
श्रीनिवासन ने 31 अक्टूबर को ही इस पद का कार्यभार संभाला है। इधर, सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, वन और गृह विभाग के अफसर दिनभर फाइलों को खंगालने और जवाब तैयार करने में जुटे रहे। हालांकि वन विभाग के प्रमुख सचिव बी.एल. आर्य का कहना है कि उन्हें विधानसभा का कोई नोटिस ही नहीं मिला है।
मुख्य सचिव टी.श्रीनिवासन सहित अन्य विभागों के प्रमुख सचिवों को बुधवार दोपहर 2 बजे विधानसभा में बुलाया गया है। सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्रसिंह शेखावत और विभिन्न समितियों के चेयरमैन भी मौजूद रहेंगे। अन्य प्रमुख सचिवों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा, आयुर्वेद, वन और गृह विभाग के प्रमुख सचिव भी मौजूद रहेंगे।
सरकार की ओर से विधानसभा में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने और सदन की समितियों की ओर से समय- समय पर की गई सिफारिशों को पिछले तीन दशक में भी लागू नहीं किया गया है। यहां तक कि नौकरशाही ने विधानसभा के कई रिमाइंडरों (स्मरण- पत्रों) को भी कोई महत्व नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष इससे खासे खफा हो गए और अफसरों को तलब कर लिया।
नौकरशाही को पहले भी मिली है फटकार
नौकरशाही को विधानसभा से पहले भी सवालों के जवाब समय पर नहीं भिजवाए जाने को लेकर फटकार मिली है। उसके बाद से सवालों के जवाब तो संबंधित विधायकों को समय पर ही मिलने लगे हैं।
इनकी भी पेशी
6 नवंबर, 2009 सुबह 11 बजे। नगरीय विकास, स्वायत्त शासन एवं आवासन विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव।
9 नवंबर, 2009 को सुबह 11 बजे। जल संसाधन विभाग, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव।
यह है नौकरशाही का हाल
एक सवाल के 11 रिमाइंडरों का भी असर नहीं। वन विभाग से संबंधित एक सवाल के जवाब से विधायक रामनारायण मीणा के असंतुष्ट होने पर प्रश्न संदर्भ शाखा ने सितंबर 2005 से सितंबर 09 तक 11 बार रिमांइडर दिए, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
जनलेखा समिति का भी असर नहीं
चिकित्सा शिक्षा विभाग में जनलेखा समिति की सिफारिशों में से जुलाई 2004 के 14, मार्च 2005 का एक और मार्च 2007 के 32 मामले लंबित हैं। इनका आज तक जवाब नहीं दिया गया है। इसी तरह जनलेखा समिति की सिफारिश पर चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव व मुख्य सचिव को बार-बार अर्धशासकीय पत्र भेजे गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।