भोपाल. बरकतउल्ला विवि के दीक्षांत समारोह की तैयारियों के लिए पिछले दिनो कराए गए कामों में करीब एक करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। विवि इनमें से ज्यादातर कामों को यूजीसी अनुदान से किया गया बता रहा है। जबकि इनमे से कई काम गैर जरूरी बताए जा रहे हैं।
विवि में पिछले एक माह के दौरान दीक्षांत समारोह की तैयारियों के लिए बेतहाशा सिविल काम कराए गए। जिनमें कुलपति निवास के रख रखाव से लेकर परिसर में नई सड़कें तक बना दी र्गई। पहले से बनी हुई और नई बनी सड़कों के ऊपर साइड में पाथ-वे पर लगाए जाने वाले ब्लॉक लगाए गए। जबकि दो साल पहले परिसर की सड़कें बनाने का काम जिस कंपनी को दिया गया था उसके भुगतान में पांच साल तक सड़कों के रख-रखाव का करार भी किया गया था। इसके बावजूद उक्त कंपनी को न बुलाकर नए ठेकेदारों से काम करवाया गया।
काटे पेड़
ज्ञान विज्ञान भवन के बगल वाले खाली स्थान में लगे लगभग 20 पेड़ वीआईपी पार्किग के लिए काट डाले गए और वहां बुलडोजर चलवाकर समतल मैदान कर दिया गया। कामों के बारे में कुलपति रवींद्र जैन सफाई देते हैं कि- हमने यूजीसी द्वारा दी गई परिसर विकास की राशि का उपयोग किया है। सितंबर तक इसे खर्च करना था, इसलिए समारोह की वजह से जल्दी काम कराए गए। इन कामों को बेवजह दीक्षांत समारोह से जोड़ा जा रहा है।
ज्ञान विज्ञान भवन से कंप्यूटर साइंस विभाग तक बनाई गई नयी सड़क के लिए बीच में आ रहे 20 से 25 साल पुराने चार-पांच पेड़ काट डाले गए। मामला सामने आने पर अब नगर निगम विश्वविद्यालय को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
नया जनरेटर आया
ज्ञान विज्ञान भवन में समारोह के दौरान बिजली आपूर्ति बहाल रखने के लिए नया जनरेटर खरीदा गया। सूत्र बताते हैं कि, 100 केवी का यह जनरेटा करीब 12 लाख रू में खरीदा गया है, जबकि कुछ साल पहले सत्य भवन के सामने लगा 100 केवी का जनरेटर महज नौ लाख में खरीदा गया था।
क्रय प्रक्रिया का पालन नहीं
विवि ने इन कामों के लिए निविदाएं भी नहीं मंगाई और मौखिक रूप से ही काम सौंप दिए दिए गए। कुलपति की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह के लिए बनाई गई समितियों के प्रभारियों को ही काम कराने के सभी अधिकार दे दिए गए। गौर तलब है कि, अभी तक एक भी समिति ने कराए गए कामों के बिल यांत्रिकी विभाग को नहीं सौंपे हैं।
कम दरों पर कराए काम- कुलपति
दीक्षांत समारोह के नाम पर कराए गए कामों के बारे मे कुलपति रवींद्र जैन सफाई देते है कि- हमने यूजीसी द्वारा दी गई परिसर विकास की राशि का उपयोग किया है। सितंबर तक इसे खर्च करना था, इसलिए दीक्षांत समारोह की वजह से जल्दी काम कराए गए। सारे काम बेहद कम दरों पर कराए गए हैं। इन कामों को बेवजह दीक्षांत समारोह से जोड़ा जा रहा है।