भोपाल. आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने कहा है कि नए मास्टर प्लान के प्रारूप में गड़बड़ियों की शिकायतें हैं। सरकार उन्हें दूर करेगी। भोपाल की अस्मिता और धरोहरों को आंच नहीं आने दी जाएगी और न ही शहर की सुंदरता, पर्यावरण और ताल-तलैयों के साथ किसी तरह का कोई खिलवाड़ होने दिया जाएगा।
भोपाल मास्टर प्लान के प्रारूप पर उभरे विवाद के बाद पहली बार टिप्पणी करते हुए श्री मलैया ने भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि किसी निजी व्यक्ति या उनके समूहों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्लान में कोई प्रावधान नहीं किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि राजधानी का बेहतर नगर नियोजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनकी कोशिश होगी कि वे जन अपेक्षाओं पर खरा उतर सकें। विकास योजना के प्रारूप में सुधार की गुंजाइश है। लगभग दो हजार आपत्तियां आई हैं, जिनकी सुनवाई 17 नवंबर से समन्वय भवन में शुरू की जा रही है।
बातचीत के प्रमुख अंश
प्रश्न- विशेषज्ञों की राय में इस प्लान में इतनी गड़बड़ियां हैं कि इसे सुधारने के बजाय निरस्त कर दोबारा ही बनाया जाना चाहिए। बावजूद सरकार इसी प्लान को सुधारने पर अडिग क्यों है?
उत्तर- ऐसा नहीं है कि इस प्लान को सुधारना नामुमकिन है, सुनवाई तो हो जाने दीजिए। जब फाइनल प्लान सामने आएगा, तो सारी कमियों को दूर कर लिया जाएगा। फाइनल प्लान की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। अगर इस प्रारूप को निरस्त कर नए सिरे से दोबारा ड्राफ्ट बनवाया जाए, तो यह एक साल पिछड़ जाएगा।
प्रश्न-अधिकारियों द्वारा तैयार प्रारूप की जनसुनवाई जनप्रतिनिधि करेंगे। ऐसे में क्या तकनीकी खामियां और गड़बड़ियां दूर हो पाएंगी?
उत्तर-सुनवाई में संचालक नगर तथा ग्राम निवेश और कलेक्टर समेत अनेक अधिकारी उपस्थित रहेंगे, इसलिए निश्चित रूप से गड़बड़ियों को दूर कर लिया जाएगा। इसके बावजूद कुछ कमी रह जाती है, तो सरकार विशेषज्ञों से परामर्श कर उन्हें दूर करने की कोशिश करेगी।
प्रश्न-इस प्रारूप के प्रकाशन के बाद आपके ऊपर भी अंगुली उठ रही है। इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर-लगभग तीन दशक से मैं सक्रिय राजनीति में हूं। मेरी पृष्ठभूमि व्यावसायिक घराने की है। निश्चित रूप से मेरा परिवार बिल्डर और डेवलपर के व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ है, लेकिन मैं दावे के साथ कहता हूं कि कोई मेरी या मेरे परिजनों की नामी या बेनामी ऐसी संपत्ति बता दे, जिसके लिए मैंने विशेष प्रावधान कराया हो, तो मैं वह उसी व्यक्ति को दे दूंगा।
प्रश्न-प्रारूप में पार्किग, पर्यावरण, मिश्रित भू-उपयोग, आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के प्रावधान किए गए हैं। इससे तो शहर के सुनियोजित विकास की अवधारणा ही ध्वस्त हो जाएगी।
उत्तर-मैं प्लान के प्रारूप पर तो कोई टिप्पणी नहीं करुंगा, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मिश्रित भू-उपयोग और आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की इजाजत देने की जरूरत है या नहीं, इसका व्यापक अध्ययन कराया जाएगा। पार्किग सुविधा तो बहुत जरूरी है, इसके लिए जमीन उपलब्ध न होने पर मल्टीलेवल पार्किग की व्यवस्था करनी होगी।
प्रश्न-मास्टर प्लान बनाने का काम तो नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय करता है, लेकिन उस पर अमल का दायित्व नगरीय निकाय का है। वरिष्ठ मंत्री होने के नाते इस विसंगति को दूर करने के लिए आपके पास क्या योजना है?
उत्तर-मैंने प्रस्ताव दिया है कि जोनल प्लान बनाने का काम नगरीय निकाय नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए यह काम आवास एवं पर्यावरण विभाग को दे दिया जाए। इसके बदले यूआईडीएसएसएमटी योजना नगरीय निकायों को सौंप दी जाए।