‘सरकार’जल्दी में
भोपाल. निकाय चुनाव की आचार संहिता का डर जनप्रतिनिधियों को अभी से सताने लगा है। अगले हफ्ते चुनाव की घोषणा के साथ ही जनप्रतिनिधियों के हाथ बंध जाएंगे। इसको देखते हुए शहरों में निर्माण कार्र्यो के भूमिपूजन, शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में एकाएक तेजी आ गई है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों ने शहरों की तरफ अपना रुख कर दिया है।
आयोग द्वारा अगले हफ्ते निकाय चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के ऐलान से राज्य सरकार को भी शहरी क्षेत्रों में अपने कार्यक्रम निपटाने के लिए सप्ताहभर का वक्त मिल गया है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यक्रम भी तय होने लगे हैं। मुख्यमंत्री के पांच दिन का शेड्यूल भी इसी बात की तस्दीक कर रहा है। इससे पहले यह माना जा रहा था कि आयोग मंगलवार को ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
इसको देखते हुए कई निकायों में भूमिपूजन, शिलान्यास के कार्यक्रम ताबड़तोड़ आयोजित कर लिए गए। जबलपुर में तो महापौर ने सोमवार रात करीब साढ़े10 बजे गोल बाजार में सड़क डामरीकरण कार्य का शुभारंभ किया, हालांकि निगम ने रात में कार्यक्रम आयोजित करने की वजह दिन में कार्यक्रम होने पर ट्रैफिक जाम होने की आशंका बताई है।
दो चरणों में चुनाव ऐलान अगले हफ्ते
प्रदेश में निकाय चुनाव दो चरणों में होंगे और 20 दिसंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। कार्यक्रम का ऐलान अगले हफ्ते होगा। अब तक आरक्षण नहीं हो पाने को तारीखें तय न होने की वजह बताते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त एवी सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग से इलेक्ट्रॉनिक मशीनें मिल र्गई तो चार बड़े शहरों में ईवीएम से मतदान कराने की मंशा है।
मंगलवार को बुलाई गई पत्रकार वार्ता में श्री सिंह इस प्रश्न का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके कि चुनाव कार्यक्रम तय हुए बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस किस मकसद से बुलाई गई है, जबकि पूर्व के चुनावों में आयोग पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करने ही बुलाता रहा है। निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि आयोग की तैयारी पूरी है।
आरक्षण का काम राज्य शासन का है। हमें आश्वासन मिला है कि नौ नवंबर को यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। चुनाव की अधिसूचना कलेक्टर को जारी करना होती है जिसमें आरक्षण और मतदान केंद्रों की संख्या भी देना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान की तारीख से 45 दिन पूर्व आचार संहिता लागू करने का कोई प्रावधान नहीं है, ऐसी प्रथा अलबत्ता है। बीते निकाय चुनाव की प्रक्रिया कार्यक्रम घोषित होने के 26 दिन में ही पूरी हो गई थी।











