नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए गठित जस्टिस लिबरहान आयोग की रपट पर की गई कार्रवाई या एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) को सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है।
यह संकेत केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को देवबंद मंे जमात- ए-उलेमा-ए-हिंद की 30 वीं आम सभा को संबोधित करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मस्जिद गिराने की घटना धार्मिक अतिवाद और अपनी धारणा को ही सही मानना था।
यह उसी तरह है जैसा धर्म के नाम पर आतंक फैलाना। चिदंबरम ने देवबंद में जमा दस हजार से अधिक उलेमाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश मुसलिम धर्म को किसी अदृश्य या दूसरी दुनिया के धर्म की तरह नहीं देखता है। यह बहुसंख्यक का कर्तव्य है कि वह अल्पसंख्यकों की रक्षा करे।
चिदंबरम ने कहा ‘सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि दूसरे देशों में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं।’ मुसलिमों और भारत को एक दूसरे का पूरक करार देते हुए चिदंबरम ने कहा ‘हमारे मुसलिम भाई हमारे देश के सम्मानित नागरिक हैं। यह आपके पुरखों की जमीन है। यह आपका जन्मस्थल है। यह वह भूमि है जहां आप रहते हैं और कार्य करते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत में इस्लाम समेत सभी धर्म यहां हैं और समान रूप से भारत का हिस्सा हैं।’ चिदंबरम ने कहा कि आखिर कोई कैसे अल्पसंख्यकों की अनदेखी कर सकता है।
तालिबानी देवबंद को बढ़ावा दे रहे हैं चिदंबरम : नकवी
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने दारूल-उलूम देवबंद पर अलगाववाद को बढ़ावा देने और देश पर तालिबानी सोच थोपने का आरोप लगाया है। देवबंद के साथ-साथ उन्होंने गृहमंत्री पी चिदंबरम को भी लपेटे में ले लिया है। वंदे मातरम के विरोध में पारित देवबंद के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए नकवी ने कहा कि ऐसे राष्ट्रविरोधी प्रस्ताव के साथ शुरू होने वाले सम्मेलन में शरीक होकर गृहमंत्री चिदंबरम ने देवबंद की तालिबानी सोच को वैधानिकता प्रदान की है।
भाजपा का मानना है कि जब सम्मेलन के पहले दिन ही ऐसा आपत्तिजनक प्रस्ताव लाया गया तो गृहमंत्री को ऐसे कार्यक्रम से दूर रहना चाहिए था मगर वह न सिर्फ उसमें शामिल हुए बल्कि अपने भाषण में प्रस्ताव के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा।