प्रशासन देखता रहा, सिख संगठनों ने कराया बंद
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 06:39 [IST]  

लुधियाना. सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को सजा देने की मांग पर सिख संगठनों की ओर से घोषित पंजाब बंद का दोपहर तक लुधियाना में काफी असर दिखा। दोपहर बाद लोगों ने अपनी दुकानें खोल लीं। मंगलवार को बंद के दौरान सड़कों पर निकले सिख संगठनों ने बाजारों में जाकर दुकानें बंद कराईं। संगठनों के प्रदर्शन व जाम के कारण शहर के अंदरुनी हिस्से का ट्रैफिक प्रभावित रहा।



गौर करने वाली बात यह रही कि बंद के दौरान पुलिस व जिला प्रशासन के हाथ बंधे दिखे। सिख संगठनों के कार्यकर्ता जबरन दुकानें व बाजार बंद कराते रहे और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने देखते रहे। बंद कराने वालों में सिख स्टूडेंट फेडरेशन (मेहता), सिख स्टूडेंट फेडरेशन (ग्रेवाल), दल खालसा, दंगा पीड़ित वेलफेयर एसोसिएशन, दंगा पीड़ित कौंसिल, पंथक एक्शन कमेटी व अन्य संगठनों के कार्यकर्ता शामिल रहे।



पुलिस ने बंद के तहत सुरक्षा प्रबंध पहले से ही कर रखे थे। पुलिस ने कई जगहों का ट्रैफिक डाइवर्ट करके दूसरे रास्तों से भी निकाला। जालंधर बाईपास से जगराओं पुल की ओर आने वाले ट्रैफिक को डाइवर्ट करके समराला चौक की ओर से निकाला गया गया।



सिख संगठनों के कार्यकर्ता सुबह इकट्ठा होकर बाजारों में बंद कराने के लिए निकले। संगठन कार्यकर्ता ने पहला पड़ाव जगराओं पुल का रखा। संगठनों ने जगराओं पुल पर धरना देकर ट्रैफिक रोका। वह केंद्र की कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। सिख स्टूडेंट फेडरेशन (मेहता) के प्रधान परमजीत सिंह खालसा के अनुसार सन् 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या केबाद हिंदोस्तान के अलग—अलग शहरों में हजारों निर्दोष सिखों का कत्लेआम किया गया।



आज 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद सिख कत्लेआम के दोषियों को सजा नहीं दी गई। बल्कि सरकार ने इन दोषियों को ऊंची पदवियों से नवाजा है। यह भारत के इतिहास में न्यायप्रणाली पर काला धब्बा है। इसके उलट अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित नौजवानों को विशेष अदालतें कायम कर सजाएं सुना दी गईं।



करीब एक घंटे तक जगराओं पुल पर प्रदर्शन करने के बाद सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं ने घंटाघर चौक और चौड़ा बाजार कर रुख किया।



संगठन कार्यकर्ता चार पहिया व दो पहिया वाहनों पर सवार थे व उन्होंने रोष स्वरूप हाथों में काले झंडे उठा रखे थे। संगठनों ने यहां चौड़ा बाजार और साथ लगते सभी बाजार बंद कराए। संगठनों ने फिरोजगांधी मार्केट में दफ्तर व बैंक बंद कराए। जवाहर नगर कैंप में बंद कराने के दौरान स्थानीय दुकानदारों से बहस हुई। माडल टाउन मेन मार्केट में भी संगठन कार्यकर्ताओं ने खुली दुकानें बंद कराईं।



यहां माहौल बिगड़ता देख खुद एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल मौके पर पहुंचे। नई कचहरी चौक के पास ढाबे वालों ने भी सिख संगठनोंे को देखकर खुद शटर गिरा दिए। दोपहर करीब एक बजे सिख स्टूडेंट फेडरेशन (मेहता) ने फील्ड गंज स्थित गुरुद्वारा श्री चेतराम में जाकर अरदास की। वहीं फेडरेशन (गरेवाल) के कार्यकर्ताओं व साथ जुड़े संगठनों ने अकालगढ़ मार्केट स्थित गुरुद्वारा अकालगढ़ में जाकर अरदास की।



आटो वालों ने लिया दोगुना किराया
बंद के कारण परिवहन व्यवस्था बिगड़ने से जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ी, वहीं आटो चालकों ने लोगों की मजबूरी का भी खूब फायदा उठाया। शहर में नामात्र के चले आटो रिक्शा में सफर करने वाले मुसाफिरों से दोगुना किराया वसूल किया गया। लोकल अड्डे से आरती चौक तक पांच रुपए किराया वसूल किया जाता है, लेकिन बंद के दौरान मंगलवार को 10 से 15 रुपए मुसाफिर से वसूल किये गए।




विरोध करने पर आटो चालक मुसाफिरों से झगड़ा भी करते दिखे। नुकसान के भय से शहर के अंदरूनी हिस्सों में चल रहे पेट्रोल पंप भी बंद कर दिए गए। जिस कारण भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए लोगों को दूर शहर से बाहर पंपों का सहारा लेना पड़ा।



सूने—सूने रहे सरकारी दफ्तर सरकारी दफ्तर भी मंगलवार को सूने—सूने दिखाई दिए। मिनी सचिवालय, जिला परिवाहन विभाग और सुविधा केंद्र जहां अकसर लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, परंतु इन दफ्तरों में मंगलवार को लोग न के बराबर ही दिखे। काम कम होने की वजह से कर्मचारियों के चेहरों पर रौनक दिखी। सुविधा केंद्र और मिनी सचिवालय के कर्मचारियों ने तो अपना ज्यादातर समय गप्पे हांक कर गुजारा।

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