तीन घंटे चली बैठक का नतीजा सिफर
Bhaskar News Wednesday, November 04, 2009 06:59 [IST]  

पानीपत. रिफाइनरी अधिकारियों और न्यू बोहली निवासियों की मंगलवार को निर्मल सिंह के मामले को लेकर टाउनशिप में बैठक हुई। जिला प्रशासन की ओर से जिला राजस्व अधिकारी-1 वीएस बठला,रिफाइनरी की ओर से कार्यकारी निदेशक आरके घोष ने बैठक की मध्यस्थता की।



जबकि ग्रामीणों की तरफ से अनूप सिंह, रामदिया और रामेश्वर वाल्मीकि ने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों में तीन घंटे चली बैठक में गांव के तकनीकी रूप से संपन्न लोगों की सूची बनाने के सिवाय कोई निर्णय नहीं हो पाया।



ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनको हक नहीं मिला तो गांव का बच्चा-बच्चा निर्मल सिंह बन जाएगा। रिफाइनरी की तरफ से महाप्रबंधक अश्वनी शर्मा, उप महाप्रबंधक वर्गीज चेरियन, उप महाप्रबंधक एस पाढी, ग्रामीणों की तरफ से सरपंच के पुत्र विक्रम सिंह, प्रेम सिंह, शीशा सिंह, रजनी बाला, रामसिंह मौजूद रहे।



अप्रेंटिस के बाद भी नहीं नौकरी



पीड़ित निर्मल सिंह की पत्नी परमजीत कौर और पिता अनूप सिंह ने कहा कि तत्कालीन सरकार और प्रधान सचिव ने ग्रामीणों से नौकरी दिलाने का वादा किया था। रिफाइनरी अधिकारियों के कहने पर गांव के दर्जनों लोगों को आईटीआई कोर्स करवाया गया। अनूप सिंह ने कहा कि उसके एक पुत्र राजेंद्र पाल ने अधिकारियों के कहने पर आईटीआई की और अप्रेंटिस भी पास की, लेकिन नौकरी देते समय उसकी अनदेखी कर दी गई।



भेजा था अधिकारियों को एसएमएस



निर्मल की चाची रजनी बाला ने कहा कि रिफाइनरी अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद नौकरी न मिलने से निर्मल काफी दुखी था। अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का जवाब न आने पर निर्मल सिंह ने जहर खाने से पहले रिफाइनरी अधिकारियों को एसएमएस किया था। लेकिन उन्होंने उसकी बातों को अनसुना कर दिया। एसएमएस करने की बात रिफाइनरी अधिकारियों ने भी मानी है।



विशेष ट्रेड को मिल सकती है नौकरी



अधिकारियों ने कहा कि आईटीआई में मैकेनिकल और डिप्लोमा में इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटल, केमिकल ट्रेड को ही नौकरी मिल सकती है। आईटीआई होल्डर की रिफाइनरी में 50 सीट हैं। किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत्ति पर ही अन्य कर्मचारी को भर्ती किया जाता है।



एमपी की चिट्ठी से नहीं मिलती नौकरी



अधिकारियों ने कहा कि मंच पर की गई घोषणा या एमपी की चिट्ठी से रिफाइनरी में नौकरी नहीं मिलती। रिफाइनरी के आसपास 25 गांव हैं। इन गांवों में 800 युवा नौकरी की मांग रखते हैं। रिफाइनरी की पूरी क्षमता ही शायद इतने कर्मचारियों की नहीं है। नौकरी के लिए नॉर्म्स पूरे करने जरूरी हैं। रिफाइनरी की ओर से गांवों में विकास कार्य करवाए जाते हैं।



कभी थे जमींदार, आज हैं नौकर



न्यू बोहली निवासी रामदिया ने रिफाइनरी अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा रोया। उन्होंने कहा कि उसके पास आठ एकड़ जमीन थी। उस समय अपनी पत्नी, तीनों बेटों के साथ खुशी से जीवन यापन कर रहा था। जमीन एक्वायर होने के कुछ दिनों बाद बच्चे अलग हो गए। आज पति-पत्नी अकेले हैं। बुढ़ापे में आराम करने की बजाय मजदूरी करनी पड़ रही है।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: