पानीपत. चेहरे पर परिवार को बेहतर ढंग से चलाने की खुशी थी तो हाउस वाइफ होने का फख्र भी। मौका था दैनिक भास्कर में हाउस वाइफ डे पर आयोजित संगोष्ठी का। मकान को घर का रूप देने की सफलता अर्जित करने वाली गृहिणियों ने मंगलवार को अपने-अपने विचार हमारे साथ साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसे विचार निकलकर आए जो युवा पीढ़ी के लिए काफी उपयोगी हैं। सभी का एक ही स्वर में कहना था कि परिवार को एक सूत्र में बांधने की जिम्मेदारी हाउस वाइफ पर होती है। उसके बिना सुखी और समृद्ध परिवार का सपना अधूरा है।
आत्मविश्वास से लबरेज गृहिणियों ने बारी-बारी से अपनी सफलता का राज बताया। परिस्थितियों के साथ समझौता कर उन्होंने कैसे परिवार की उन्नति में सहयोग किया, सर्दी हो या गर्मी, बुखार हो या दफ्तर जाना हो, उन्होंने प्राथमिकता हमेशा अपने परिवार को ही दी।
सभागार में बैठी सबसे बुजुर्ग हाउस वाइफ कौशल्या ने जब अपने अनुभव बताए तो सभी कुछ देर के लिए भावुक भी हो गए। कौशल्या ने बताया कि एक सफल हाउस वाइफ बनने के लिए आत्मसमर्पण का होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
आशा रानी जैन ने कहा कि हाउस वाइफ को जीवन भर अलग-अलग किरदार निभाने पड़ते हैं। कभी उसे खाना बनाने वाली तो कभी कपड़े धोने वाली, कभी मां तो कभी बेटी और कभी पत्नी बनना पड़ता है। जो महिला इन सभी किरदारों को बेहतरीन तरीके से निभाती है, वही असली हाउस वाइफ कहलाती है।
ऊषा सांगवान ने कहा कि वर्किग वूमन ज्यादा अच्छे तरीके से परिवार को चला सकती है। उसे अच्छी तरह से मालूम होता है कि उसे अपने बच्चे और परिवार को कैसे सफलता के शिखर पर ले जाना है। पल्लवी गोयल और सुनीता शर्मा ने कहा कि गृहिणियों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है, ताकि संघर्ष के दिनों में वह भी अपना सहयोग दे सकें।
दीपिका सिंगला और प्रोमिला सिंगला कहती हैं कि परिवार के लिए अगर नौकरी को त्यागना हो तो इसमें जरा भी झिझकना नहीं चाहिए। नेहा और ममता बंसल ने कहा कि अगर परिवार में कोई परेशानी आ रही हो तो उस पर खुलकर बात करनी चाहिए।
कृष्ण रोहिल्ला और संतोष शर्मा ने इस बात की वकालत की, कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। रामवीर भारद्वाज, राका शर्मा और वंदना ने कहा कि परिवार बनाने में जो भी त्याग करना पड़े, उसे जरूर करना चाहिए।
इस दौरान गृहिणियों ने बताया कि किस प्रकार उनके द्वारा की गई छोटी-छोटी बचत मुश्किल समय में परिवार के लिए काम आई। उन्होंने कहा कि गृहिणी को बचत भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृहिणी को अपने बच्चों की परवरिश में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़नी चाहिए। इस मौके पर दैनिक भास्कर के जीएम राजीव गौतम और एक्जूक्टिव रीडर कनेक्ट प्रियंका राजपाल मौजूद रहीं।
धैर्यवान जरूरी
घर की कमान सफलतापूर्वक संभालने वाली गृहिणियों ने बताया कि सक्सेसफुल हाउस वाइफ को धैर्यवान, ईमानदार, सभी की जरूरतों का ध्यान रखने वाला होना चाहिए। एक मकान में रहने वाले लोगों को घर का महौल तभी मिल सकेगा जब घर को संभालने वाली महिला सभी को एक साथ लेकर चलने और उनकी समय पर इच्छापूर्ति करने वाली होगी।