नई दिल्ली. भारत में दूरसंचार क्रांति पर इतराने वालों को इसका एक और बहाना मिल गया है। दिल्ली-मुंबई-चेन्नई और कोलकाता ने सौ प्रतिशत मोबाइल घनत्व के मामले मे पेरिस-लंदन-टोक्यो-न्यूयार्क-सिंगापुर व हांगकांग की बराबरी कर ली है। इन चारों ही शहरों मंे मोबाइल फोन की संख्या यहां मौजूद जनसंख्या के आंकड़े को भी पार कर गई है।
इन शहरों मे जितने लोग हैं उसके मुकाबले यहां पर फोन अधिक है। यो आंकड़े स्वयं दूरसंचार विभाग ने 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए बनाई गई सूचना पुस्तिका में दी है। यह पुस्तिका उन देशी व विदेशी टेलीकॉम कंपनियों को दी जानी है जो 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी में रुचि रखते हैं।
चेन्नई सबसे आगे : दूरसंचार विभाग की इस पुस्तिका के मुताबिक जनसंख्या व मोबाइल के इस संख्या खेल मंे चेन्नई सबसे आगे है। यहां पर हर सौ व्यक्ति के पास 143 मोबाइल कनेक्शन है। इसका तात्पर्य हुआ कि हर व्यक्तिके पास 1.43 मोबाइल फोन है।
दूसरे नंबर पर दिल्ली है। यहां प्रति सौ व्यक्ति पर 138 मोबाइल कनेक्शन है। तीसरे नंबर पर मुंबई है। यहां पर हर सौ व्यक्ति के पास 112 मोबाइल कनेक्शन है। चौथे नंबर पर कोलकाता है। यहां पर सौ व्यक्ति के पास 102 मोबाइल कनेक्शन है। चेन्नई में एयरसेल, दिल्ली में एयरटेल, जबकि कोलकाता व मुंबई में वोडाफोन व रिलायंस पसंदीदा पहले ऑपरेटर हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधियों के मुताबिक महानगरों में लगातार आने वाली आबादी, लोगों में दो कनेक्शन रखने की इच्छा, लगातार आने वाले ऑफर इसकी बड़ी वजह है। इन कंपनियों का मानना है कि महानगरों में डेटा कार्ड, इंटरनेट के ज्यादा प्रयोग की वजह से भी लगातार मोबाइल कनेक्शन बढ़ रहे हैं।
लेकिन हेल्पलाइनों पर पड़ने लगा उलटा असर: प्रति पैसा-प्रति सेकेंड के सहारे दूरसंचार कंपनियां अपनी झोली नए ग्राहकों से तो भरना चाहती है लेकिन उसकी कोशिश है कि जब तक हो पुराने ग्राहकों को ये ऑफर लेने से रोक कर रखा जाए। यही वजह है कि एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, टाटा टेलीसर्विसेस जैसी बड़ी कंपनियां पुराने बिल प्लान लेने वाले ग्राहकों के मोबाइल से कस्टमर केयर को किए गए फोन को एक बार में कस्टमर केयर प्रतिनिधि से कनेक्ट ही नहीं करते हैं।
इसके लिए ग्राहकों को 10 से 15 मिनट इंतजार कराया जाता है। कुछ कंपनियां एसएमएस करने पर ग्राहकों को अगले बिल चक्र से ये योजना देने का वादा करती है। जबकि पुराने बिल प्लान के लिहाज से चाहे ग्राहक एक या दो दिन पहले ही अगले बिल प्लान में गया हो। इसकी वजह बताते हुए एक टेलीकॉम कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘पुरानी कंपनियों के करीब 20-30 प्रतिशत ग्राहक ऐसे बिल प्लान में है जिससे कंपनियों को पांच सौ से 2000 रुपए महीना मिलता है। ऐसे में उन्हें तुरंत नए बिल प्लान में डालने से कंपनी को नुकसान ही होगा। इसके अलावा कई बार तकनीकी व्यवस्था भी इसकी वजह होती है।’