ढोढर. लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के अधिकार की राशि में की गई अनियमितता ने सोसायटी अध्यक्ष के दावेदार से उनकी कुर्सी छीन ली। लंबी खींचतान के बाद मंगलवार को हुई सोसायटी प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक में अंतत: सुनील चौरड़िया को पुन: अध्यक्ष बनाया गया। इसमें विधायक की भी एक न चली।
सेवा सहकारी संस्था के अध्यक्ष श्री चौरड़िया ने राजनीतिक दबाव के चलते शुक्रवार को त्याग-पत्र दिया था। इस पर विचार के लिए मंगलवार को प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक हुई। पूर्ण कोरम के साथ हुई बैठक में संचालक मंडल सदस्यों ने त्याग-पत्र स्वीकृति पर सहमति नहीं दी। करीब दो घंटे तक चली खींचतान के बाद सर्वानुमति से श्री चौरड़िया को पुन: अध्यक्ष बनाया गया।
इस अवसर पर शाखा प्रबंधक रवींद्र¨सह राठौर, संस्था प्रबंधक ओमप्रकाश शर्मा, संचालक सदस्य जालम¨सह पंवार, मथुरालाल, भंवरलाल पटेल, मुकेश चौधरी, शांतिलाल पटेल, पवन जैन, बलवंत¨सह पंवार आदि उपस्थित थे।
यह है मामला - फरवरी २क्क्७ में संस्था के संचालक मंडल के निर्वाचन हुए थे। उस दौरान ७ सदस्य कांग्रेस समर्थित तथा ४ भाजपा समर्थित चुने गए। इस दौरान बहुमत के आधार पर कांग्रेस समर्थित सदस्यों में से श्री चौरड़िया व ओमप्रकाश पाटीदार ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि श्री चौरड़िया व श्री पाटीदार ढाई-ढाई साल तक अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।
निर्णय अनुसार प्रथम ढाई साल के लिए श्री चौरड़िया ने पदभार संभाला। करीब दो माह पूर्व श्री चौरड़िया के ढाई साल पूरे हो गए और संचालक मंडल सदस्यों के न चाहते हुए भी राजनीतिक दबाव के चलते श्री चौरड़िया ने त्याग-पत्र देकर श्री पाटीदार को कार्यभार सौंपने की पहल की।
श्री पाटीदार के पक्ष में इसलिए नहीं था संचालक मंडल - लोकसभा चुनाव के दौरान पोलिंग बूथ पर बैठे पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए संगठन से प्राप्त राशि में अनियमितता करने का आरोप उस दौरान श्री पाटीदार पर लगाया गया था तब से ही संचालक मंडल सदस्यों ने यह ठान लिया था कि अगले ढाई साल के लिए श्री पाटीदार को अध्यक्ष नहीं बनाया जाए। अंतत: हुआ भी यही और श्री पाटीदार को अध्यक्ष पद नहीं मिल सका।
विधायक की नहीं चली - श्री पाटीदार प्रबंध कार्यकारिणी बैठक के दो दिन पूर्व कुछ संचालक मंडल सदस्यों को लेकर विधायक महेंद्रसिंह कालूखेड़ा से मिले। उन्हांेने सदस्यों को श्री पाटीदार के समर्थन में यह जवाब दिया कि संस्था निर्वाचन के दौरान हुए निर्णय अनुसार ही अगले ढाई साल के लिए अध्यक्ष बनाया जाए।