रायपुर. पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के यांत्रिकी विभाग से मेजरमेंट व बिल बुक गायब हो जाने से बस्तर विश्वविद्यालय के अकादिमिक भवन का हस्तांतरण अटक गया है। इसका एकमात्र कारण निर्माण एजेंसी का भुगतान न हो पाना है। प्रकरण को निपटाने के लिए प्रशासन द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है लेकिन वह भी बिना बिल बुक के भुगतान करा पाने में असमर्थ है।
बस्तर परिसर के प्रशासनिक भवन एवं अकादमिक भवनों के लिए राज्य शासन ने 125 लाख का अनुदान विश्वविद्यालय को दिया था जिससे प्रशासनिक व अकादमिक भवन निर्मित होने थे। इसके लिए निविदा जारी होने के बाद अनुबंध किया गया एवं बस्तर भवनों का प्रभारी सहायक यंत्री बीपी. भंवर को बनाया गया था। प्रशासनिक भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अकादमिक भवन में ठेकेदार का भुगतान न हो पाने के कारण अभी खिड़कियों सहित कुछ काम बाकी है।
इसके लिए विश्वविद्यालय विभाग के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सहायक यंत्री श्री भंवर को नोटिस देकर बुक के संबंध में पूछा गया तो, उन्होंने कार्यालय में होने की जानकारी दी। इसके बाद सहायक यंत्री के कार्यालय की जांच पड़ताल विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों द्वारा की गई, लेकिन बिल बुक नहीं मिली। इसकी शिकायत सरस्वती नगर थाने में की गई है।
गौरतलब है कि बस्तर परिसर के भवनों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा लोहा की सप्लाई की गई थी। इसमें परिवहन के समय गड़बड़ी की शिकायतों पर सहायक यंत्री बीपी. भंवर को निलंबित कर दिया गया था। हस्तांतरण अटकने पर राज्य शासन ने एक दल गठित कर बस्तर परिसर के दोनों भवनों के देयक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस दल में अनुविभागीय अधिकारी जगदलपुर एसपी. संभारकर, सहायक अभियंता राजेंद्र सोनकर व उप अभियंता आशीष साव को शामिल किया गया है। देयक प्रस्तुतिकरण के लिए कुल सचिव को पत्र भेजा गया, जिसके जबाव में प्रशासन ने उपलब्ध दस्तावेज तो सौंप दिए लेकिन माप पुस्तिका व बिल बुक नहीं दी गई है।