रायपुर. रंगमंच में सक्रिय भागीदारी कर रहे लोगों का कहना है कि एक भी प्रेक्षागृह ऐसा नहीं है, जिसके सहारे वे अपनी प्रतिभा को ऊंचाई तक पहुंचा सकें। रंगकर्म से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रदेश की सरकार यदि 100 करोड़ रुपए लगाकर स्टेडियम का निर्माण कर सकती है और मेंटेनेंस पर लाखों रुपए खर्च कर सकती है, तो एक अच्छा प्रेक्षागृह क्यों तैयार नहीं करा सकती।
इप्टा के संयोजक सुभाष मिश्र इस संदर्भ में कहते हैं कि 13 नवंबर से शहर में इप्टा गजानन माधव मुक्तिबोध की पुण्यतिथि पर १३वां राष्ट्रीय नाटच्य समारोह रख रहा है। इसमें न सिर्फ शहर के कलाकार, बल्कि दुर्ग, भिलाई, डोंगरगढ़ और बिलासपुर के भी कलाकारों टीमें शिरकत करेंगी। यह ऐसा समारोह है जिसके जरिए हम युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए मंच प्रदान करते हैं।
इस समारोह में रंगकर्मी, फिल्म निर्देशक आदि अपनी कला का प्रदर्शन कर युवाओं और शहर के लोगों में कला व संस्कृति की सही समझ पैदा करने की मुकम्मल करते हैं। शहर में अत्याधुनिक तकनीक वाला प्रेक्षागृह न होने पर रंगकर्मियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि मणिपुर के कोरस रेपर्टरी के सदस्य और रंगमंच के जाने माने कलाकार रतन थियम ने अभी होने वाले मुक्तिबोध नाट्य समारोह में आने से इन्हीं कारणों से मना कर दिया था। बाद में बहुत विनती करने पर वे आने को राजी हुए। यह हमारे शहर के लिये अफसोसजनक है।
थिएटर में बढ़ने के लिए समझ जरूरी : थिएटर के क्षेत्र में पांव पसार रहे लोगों के लिए श्री मिश्र कहते हैं कि इसकी दुनिया को जाने समझे बिना नाटक में अपनी जगह तलाश रहे लोगों के लिए खतरा यह है कि वे नाटक की विभिन्न शैलियों से अनभिज्ञ रहते हैं और मंच पर नाटक करते हुए उनका संयोजन ठीक तरह से नहीं होता, इसलिए वह कटा हुआ सा नजर आता है।
चेतना पैदा करेंगे नाटक
आठ दिन के नाट्य समारोह में पुलिस ट्रेनिंग (इप्टा रायपुर), हमसफर (सलीम आरिफ), गिरिजा के सामने (एमएससथ्यू), बलि और शंभू (मानव कौल), तुक्के पे तुक्का (बंसी कौल), वासांसि जीर्णानि (चंद्रहास तिवारी), बड़े भाई साहब (विजय कुमार), दूसरा अध्याय (विजय कुमार), कैमरे की आंख (योग मिश्र), प्रथम व्यक्ति (बालकृष्ण अय्यर), व्हेनवी डेड अवेकन (रतन थियम) शामिल होंगे। समारोह का उद्घाटन प्रसिद्ध नाटच्य निर्देशक एमएस सथ्यू करेंगे।