अस्पताल में मिला मां का प्यार
Bhaskar News Wednesday, November 04, 2009 07:40 [IST]  

रतलाम. आंखें खोली तो अपनों की निष्ठुरता ने उन्हें खुला आसमान और जमीन की सख्ती दी लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर व नर्सो की तिमारदारी ने अपनापन और वात्सल्य दिया। सोमवार रात सेंट्रल स्कूल परिसर में कपड़े की पोटली में मिली अबोध बालिका को करीना नाम दिया गया है। इसे नर्सों और डॉक्टरों का दुलार मिल रहा है। उसे सवा माह की बालिका पलक का साथ भी मिला है।



बाजना रोड पर स्थित सेंट्रल स्कूल परिसर में मुख्य द्वार के पास बाउंड्रीवॉल की जाली पर कोई नवजात बालिका (करीना) को कपड़े की पोटली में बांधकर छोड़ गया था। रात करीब 10.30 बजे स्कूल के कर्मचारी भ्रमण पर निकले तो उन्हें बच्चे के रोने की आवाज आई थी। उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस को दी। बाद में बच्ची को अस्पताल लाकर छोड़ा गया।



गहन चिकित्सा इकाई में बच्ची के आने पर नर्सो ने तत्काल उसकी सेवा शुरू की। डॉक्टरों ने उसका वजन कर चेकअप किया। इकाई प्रभारी डॉ. अजीतसिंह कुशवाह ने बताया बालिका का नाम करीना रखा गया है। वह पूरी तरह स्वस्थ है। जन्म के समय बच्चे का सामान्य वजन करीब ढाई किलो होना चाहिए। करीना का वजन 2.6 किलो है।



माता-पिता की तरह मिलता है प्यार- नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में लावारिस बच्चों को नर्सो व डॉक्टरों का पारिवारिक साथ मिल रहा है। नर्से व डॉक्टर बच्चों का माता-पिता की तरह ध्यान रखते हैं। जरा-सा रोने पर नर्से व डॉक्टर उन्हें गोद में ले लेते हैं और प्यार कर चुप कराने का प्रयास करते हैं।



मंगलवार को दोपहर जब भास्कर संवाददाता इकाई में पहुंचा तो नर्से बच्चों को गोद में लिए उनकी सेवा कर रही थी। डॉ. कुशवाह ने बताया इकाई में 12 नर्से हैं और तीन डॉक्टर हैं। आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में चार-चार नसोर्ं की डच्यूटी लगाई जाती है। नर्से पूरे समय बच्चों की देख-रेख करती रहती हैं। बच्चों को अधिकतर समय गाय का दूध दिया जाता है।



चार माह में तीन बालिका- शहर में लावारिस नवजात बच्चों के मिलने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले चार माह में तीन बच्चे अलग-अलग स्थानों पर मिले और तीनों ही बालिकाएं निकली। 1 जुलाई 09 को जिला अस्पताल के बगीचे में एक नवजात बालिका लावारिस मिली थी। उसे नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में करीब दो माह तक रखा गया और उसकी नाम परी रखा था।



बाद में सारंगपुर (राजगढ़) निवासी एक दंपति उसे गोद ले गए। इसके बाद 28 सितंबर को रेलवे स्टेशन पर रेल पटरियों के पास नवजात बालिका मिली थी इसे जीआरपी ने गहन चिकित्सा इकाई में पहुंचा था। इसका नाम पलक रखा गया और अब सेंट्रल स्कूल परिसर से बालिका को इकाई में लाया गया है।



सबसे कम वजन परी का- नवजात गहन चिकित्सा इकाई में चार माह में लाई गई तीन लावारिस बालिकाओं में सबसे कब वजन परी का था। परी जब इकाई में लाई गई थी तब उसका वजन 1 किलो 700 ग्राम ही था।

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