बिलासपुर. रेलवे के अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर ट्रेनों का परिचालन कराने लगे हैं। रायगढ़ और कोरबा स्टेशन में अयोग्य ड्राइवरों को क्रू कंट्रोलर बनाने के साथ ही मालगाड़ी के ड्राइवरों से पैसेंजर ट्रेन चलवाने का मामला सामने आया है। बिलासपुर मंडल में ट्रेन ड्राइवरों के लगभग 3 सौ पद रिक्त हैं। इसी कमी के चलते ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो रहा है।
स्थिति यह है कि भारी लदान का लक्ष्य और यात्री ट्रेनों को नियमित समय में चलाने के लिए अधिकारी नियमों की अनदेखी तक करने लगे हैं। मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों के परिचालन के ड्राइवरों की व्यवस्था करने वाले क्रू कंट्रोलर को 3 वर्ष बाद बदलने का नियम है, लेकिन कंट्रोलर चार-चार वर्ष से प्रभार संभाल रहे हैं। इसका प्रमाण रायगढ़ रेलवे स्टेशन में मिला।
यहां वर्ष 2004 से 2008 तक क्रू कंट्रोलर का पद संभालने वाले ड्राइवर बी साहू को एक बार फिर क्रू कंट्रोलर बना दिया गया। इतना ही नहीं, परिचालन विभाग ने पर्सनल विभाग के उस आदेश की भी अनदेखी की, जिसमें श्री साहू को क्रू-कंट्रोलर के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया। यही हाल कोरबा रेलवे स्टेशन का है। क्रू-कंट्रोलर के लिए 3 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है, लेकिन यहां जूनियर ड्राइवर को क्रू-कंट्रोलर बना दिया गया।
ट्रेन ड्राइवर विवेक शुक्ला पिछले एक वर्ष से क्रू-कंट्रोलर का पद संभाल रहे हैं। यही हाल मंडल के अन्य स्टेशनों का है। ए-वन ड्राइवरों से पैसेंजर ट्रेन चलवाने के बजाय परिचालन विभाग इन्हें रिलीविंग ड्यूटी पर लगा रहा है। इसके कारण मालगाड़ियों के ड्राइवरों को पैसेंजर ट्रेन चलानी पड़ रही है, जो सुरक्षा नियमों के विपरीत है।
अधिकारियों की नक्शेकदम पर क्रू-कंट्रोलर भी चलने लगे हैं और मालगाड़ियों के ड्राइवरों से पैसेंजर ट्रेनें चलवाई जा रही हैं। अयोग्य कर्मचारियों को क्रू-कंट्रोलर बनाए जाने के संदर्भ में बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ विद्युत अभियंता (परिचालन) आलोक सहाय से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
क्या है नियम
रेलवे बोर्ड के नियमानुसार 3 साल तक लाइन में काम करने वाले ट्रेन ड्राइवरों को अन्य योग्यताओं की पूर्ति के बाद क्रू-कंट्रोलर बनाया जा सकता है। इसी तरह क्रू-कंट्रोलर के पद पर 3 साल पदस्थ रहने वाले ट्रेन ड्राइवर को अगले 3 वर्ष तक लाइन पर कार्य करना अनिवार्य है। कोरबा और रायगढ़ स्टेशन में उक्त नियमों की अनदेखी हो रही है।