बिलासपुर. राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने बीएड के छात्रों को दूरदराज के एडमिशन सेंटर बदलकर सेंटर तय करने की छूट देकर राहत तो दी, लेकिन करीब आधी पढ़ाई कर चुके छात्र मानते हैं कि सेंटर चेंज करने से उन्हें राहत मिलने की बजाय परेशानियां और भी बढ़ेंगी। यही वजह है कि अधिकांश छात्र सेंटर बदलने के पक्ष में नहीं हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने जुलाई में बीएड की ऑनलाइन काउंसिलिंग आयोजित की थी।
ऑनलाइन काउंसिलिंग में राज्य भर से सैकड़ों छात्र शामिल हुए थे। काउंसिलिंग के बाद बीएड छात्रों को एडमिशन सेंटर आबंटित किए गए थे। कई छात्रों को दूरदराज के एडमिशन सेंटर मिले थे। घर से बाहर जाकर बीएड की पढ़ाई करने से छात्र-छात्राओं को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा था।
इससे छात्रों को अधिक खर्च भी वहन करना पड़ रहा था। भिलाई, दुर्ग के बीएड कालेजों में जिले के छात्रों को एडमिशन मिलने से परेशानियां बढ़ गई थी और इस संबंध में एससीईआरटी को अपनी समस्या भी बता चुके थे। सबसे ज्यादा दिक्कत बीएड की पढ़ाई कर रही लड़कियों को थी, जिन्हें दूरदराज के कालेजों में एडमिशन मिला था।
क्या आएंगी दिक्कतें: एडमिशन चेंज करने का निर्णय तो राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने तो दे दिया, लेकिन यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि तकनीकी तौर पर आने वाली परेशानियों को छात्र कैसे दूर कर पाएंगे। बीएड कालेजों में पढ़ाई काफी आगे बढ़ चुकी है। फरवरी में प्रेक्टिकल के बाद परीक्षा की तैयारी है।
ऐसे में देर से दी गई राहत और एडमिशन सेंटर चेंज करने के बाद दोनों सेंटरों की पढ़ाई में तारतम्यता छात्र कैसे बैठा पाएंगे यह नहीं सोचा गया। प्राइवेट कालेजों की फीस अलग-अलग हैं, निर्णय के बाद फीस की उलझन सुलझाने की जहमत छात्र उठाने को तैयार नहीं हैं।
क्या कहते हैं छात्र
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब छात्रों के लिए करने को कुछ नहीं है। यही निर्णय पहले लिया जाता तो हो सकता था कि छात्रों का कुछ भला हो जाता। अब इस निर्णय बहुत अधिक महत्व नहीं है। - आशुतोष शुक्ल, छात्र
निर्णय तो थोप दिया लेकिन निर्णय के बाद होने वाली परेशानियों का विश्लेषण नहीं किया गया जो छात्रों को होनी है। काउंसिलिंग के दौरान होने वाली परेशानी के बाद एक बार फिर परेशानी नहीं उठा सकते। - राजमणि तिवारी, छात्र
छात्र हित में मौके पर कोई निर्णय हुआ हो याद नहीं। हमेशा अपनी सहुलियतों के लिए छात्रों को तब आश्वासन मिलता है और निर्णय भी होता है तो उसकी महत्ता नहीं के बराबर रहती है। राज्य शैक्षिक परिषद का निर्णय स्वागत योग्य तो है लेकिन लाभ लेने के लिए अब काफी देर हो चुकी है। - संस्कार श्रीवास्तव, छात्र