बिलासपुर. शिक्षाकर्मियों के भर्ती नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता, जस्टिस एसके सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका को स्वीकार कर राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। राज्य शासन द्वारा पिछले महीने शिक्षाकर्मी भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। इसके अनुसार पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपद पंचायत व जिला पंचायतों के माध्यम से शिक्षाकर्मियों की भर्ती की जा रही है।
इसके लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा 29 नवंबर को लिखित परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा भर्ती नियम के अनुसार शिक्षाकर्मी वर्ग-एक व दो के लिए स्नातक व स्नातकोत्तर की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास होना जरूरी है। इससे कम अंक वालों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं है। भर्ती नियम को चुनौती देते हुए जशपुर निवासी बलराम यादव व अन्य दो लोगों ने वकील एएन भक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
इसमें कहा गया है कि इस नियम को बनाने से प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठने से वंचित हो गए हैं। इसमें से अधिकतर आदिवासी वर्ग के हैं, जो तृतीय श्रेणी में परीक्षा पास होने के कारण शिक्षाकर्मी भर्ती में शामिल नहीं हो पाएंगे। सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी कर राज्य शासन को निर्देशित किया है कि चार सप्ताह में जवाब दें कि आवेदकों के द्वितीय श्रेणी में पास होने की बाध्यता किस आधार पर तय की गई है।
लगातार हो रहा विरोध
शिक्षाकर्मी भर्ती का विज्ञापन जारी करने के बाद से शासन के इस नियम का लगातार विरोध किया जा रहा है। कुछ छात्र संगठन इसके खिलाफ आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं, क्योंकि सेकेंड डिवीजन की बाध्यता से प्रदेश में हजारों बेरोजगार इस परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह जाएंगे।