राशन व्यवस्था में खामी
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 07:57 [IST]  

अजमेर. सार्वजनिक वितरण प्रणाली की समीक्षा कर रहे केंद्रीय सतर्कता दल के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस डीपी वाधवा ने कहा कि भारत में राशनिंग व्यवस्था में सुधार की बहुत गुंजाइश है। व्यवस्था में कमियों के कारण कालाबाजारी होती है जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है।



मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में वाधवा ने कहा कि नियमित निगरानी और समन्वय के अभाव के कारण राशन सामग्री के वितरण में कालाबाजारी होती है। उपभोक्ताओं तक राशन सामग्री पूरी मात्रा में नहीं पहुंचती है। जस्टिस वाधवा ने माना कि राशन विक्रेताओं का कमीशन कम होने के कारण वे गलत रास्ता अपनाते हैं।



उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक रहना होगा और मीडिया को अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा। सतर्कता दल ने 12 राज्यों का दौरा कर लिया है, शेष राज्यों का दौरा कर आगामी दिनों में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगा। रिपोर्ट में खासतौर पर वितरण प्रणाली का ऑल इंडिया लेवल पर कंप्यूटरीकरण करने की सिफारिश की जाएगी।



आटा-दाल योजना की सराहना



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आटा— दाल योजना की सराहना करते हुए वाधवा ने कहा कि इस तरह की योजनाओं से सभी को राशन मिलेगा और बेईमानी की गुंजाइश भी कम होगी। इससे पूर्व दल के सदस्य नायोमी चंद्रा, मोहित रॉय, पीके मित्तल, जीके बूटानी, मीनाक्षी चौहान और प्रवर्तन निरीक्षक रेणुका चौधरी ने राशन की दुकानों का निरीक्षण कर राशनिंग व्यवस्था को जाना और उपभोक्ताओं से बातचीत की।



कलाबाजारी हो गई



जस्टिस डीपी वाधवा ने राशन वितरण प्रणाली पर कहा कि राशन वितरण में कालाबाजारी कला बाजारी का रूप लेती जा रही है, लोग नए नए तरीकों से कालाबाजारी कर इसे कला बाजारी बनाते जा रहे हैं। उन्होंने व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए कहा कि यहां पर ‘हम सब चोर हैं’ फिल्म जैसा लगता है।

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