महंगाई की मार, कैसे पके बच्चों का पोषाहार!
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 08:05 [IST]  

अजमेर. प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को परोसा जाने वाला पोषाहार भी महंगाई की चपेट में आ गया है। दाल, तेल व सब्जियों सहित अन्य वस्तुओं के नित बढ़ते दामों के कारण संस्था प्रधान और पोषाहार प्रभारी को अतिरिक्त राशि की व्यवस्था करनी पड़ रही है। महंगाई के बावजूद दो से ढाई रुपए में एक बच्चे को खाना परोसने की मजबूरी के चलते पोषाहार की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है।



प्रारंभिक शिक्षा विभाग के 2200 विद्यालयों में करीब 1 लाख 54 हजार बच्चे अध्यनरत हैं। विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में प्राइमरी तक के बच्चे के एक दिन के पोषाहार के लिए 2 रुपए 8 पैसे तथा कक्षा 6 से 8 तक के बच्चे के पोषाहार के लिए 2 रुपए 60 पैसे के हिसाब से बजट जारी किया जाता है। इसी बजट में स्कूल प्रशासन को दाल, सब्जी, मसाले, तेल और सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले मौसमी फल की व्यवस्था करनी होती है।



बिगड़ा खेल



काफी समय से बढ़ रहे दाल और हाल ही बढ़े आलू के दामों ने स्कूल प्रशासन का खेल बिगाड़ रखा है। अमूमन इन दिनों 8—10 रुपए तक प्रति किलो बिकने वाला आलू अब 20 रुपए बिक रहा है। वहीं दाल 50—60 की बजाय 80—90 रुपए प्रति किलो बिक रही है। बजट बिगड़ने से परेशान पोषाहार प्रभारी और संस्था प्रधान को अपने स्तर पर ही अतिरिक्त धन का बंदोबस्त करना पड़ रहा है।



मरता क्या न करता



जेब से खर्च कर पोषाहार खिलाने वाले कुछ विद्यालयों ने नया रास्ता अपना लिया है। सूत्रों के अनुसार छात्रों की संख्या ज्यादा दर्शाकर या शत—प्रतिशत नामांकन बताकर विभाग से अधिक बजट मांगा जा रहा है। विभागीय जांच में ऐसे प्रकरण सामने आए हैं। कहीं कम मात्रा में पोषाहार बनाया जा रहा है तो कहीं गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।



हर कोई चाहे बचना



अब पोषाहार चार्ज देने को लेकर भी झगड़े होने लगे हैं। विभाग को ऐसी शिकायतें रोजाना मिल रही हैं। जेब से खर्च होने और रोजाना जांच के चलते शिक्षक पोषाहार प्रभारी नहीं बनना चाहते। पोषाहार चार्ज थोंपने को लेकर अध्यापकों में बहस होने लगी है।



जताया विरोध



29 अक्टूबर को हुई बैठक में संस्था प्रधानों ने जिला शिक्षा अधिकारी बिरदासिंह रावत के समक्ष विरोध प्रकट किया था। उन्होंने अधिक बजट जारी नहीं होने पर पोषाहार नहीं पकाने की चेतावनी तक दी थी।

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