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Wednesday, November 04, 2009 08:05 [IST]  

danik bhaskarफिल्म सेंसरबोर्ड खत्म हो : अनुराग कश्यप

राजेश यादव

मुंबई. 11वें मुंबई फिल्म महोत्सव में फिल्मों के निमार्ण, व्यापार, विस्तार के साथ फिल्मों की सेंसरशिप को लेकर चर्चा का माहौल बनता दिख रहा है। एक तरफ देव डी जैसी बोल्ड फिल्म बनाने वाले अनुराग कश्यप ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा है कि सेंसर बोर्ड खत्म होना चाहिए और लोग खुद तय करें क्या सहीं है और क्या गलत है। सेक्स पर सीधी बात करना अश्लीलता नहीं मानी जाना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ एक कप चाय जैसी जैसी सामाजिक फिल्म के निमार्ण से जुड़े मराठी फिल्म निर्देशक सुनील सुखथानकर ने भी दैनिक भास्कर को दिए गए एक साक्षात्कार में फिल्मों पर सेंसरशिप का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। सच को दिखाने का सबकी अपनी अपनी सोच होती है और इस पर लगाम लगाना सहीं नहीं है। सेंसर बोर्ड अब गैर जरूरी हो गया है और बेहतर रियलिस्टिक सिनेमा का निमार्ण के लिए सेंसर की कैंची पर लगाम लगनी चाहिए।

लेकिन इसके लिए उन्होंने बाजारवाद को भी जिम्मेदार माना है, उन्होनें कहा कि उनकी फिल्म दोगही में भी सच दिखाया गया था और जब इसी कहानी को जब यशराज फिल्म ने दिखाया तो वहां सच को दिखाने के लिए बोल्ड सीन को फिल्मानें में संकोच नहीं किया गया।

एक तरफ फिल्मों को लेकर निर्देशकों की इस तरह की सोच सामने आ रहीं है तो दूसरी तरफ 11वें मुंबई फिल्म महोत्सव में बोल्ड और ब्यूटीफूल फिल्मों को दर्शको द्वारा पसंद किया जा रहा है वहीं एंटी क्राइस्ट को लेकर कुछ हंगामेदार बातें भी हुई है। एंटी क्राइस्ट को जहां कई फिल्म महोत्सव में पसंद किया गया है वहीं मुंबई में फिल्म के प्रदर्शन के बाद इसकी बोल्डनेस को लेकर सवाल भी उठे हैं। मनसे कार्यकर्ताओं ने कुछ विरोध जरुर किया है ।

11वां फिल्म महोत्सव कुछ नए सवालों की खोज करता नजर आ रहा है और सबसे खास बात युवा दर्शको की संख्या इस बार महोत्सव में अच्छी खासी नजर आ रहीं है और आयोजकों की मेहनत रंग लाती नजर आ रहीं है।

सेंसर बोर्ड कौन होता है

जो सच है उसे कहने में किसी तरह की रोक टोक नहीं होनी चाहिए और मुझे लगता है सेक्स पर सीधे बात करने में किसी भी प्रकार की अश्लीलता जैसी बात नहीं है। सेंसर बोर्ड खत्म कर देना चाहिए। - अनुराग कश्यप, ख्यात हिन्दी फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक

सेंसर बोर्ड खत्म होना चाहिए, साथ ही फिल्मकारों को रियलिस्टिक फिल्मों के निमार्ण के समय बेहद गंभीरता का ध्यान रखना चाहिए। जरुरी नहीं की जो बोल्ड हो वह ब्यूटीफुल भी हो।- सुनील सुकथानकर , मराठी फिल्म निर्देशक

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विचार:

ashish bajpai

Wednesday, 4th Nov 2009, 11:13
सेंसर बोर्ड खत्म होना चाहिए। सेंसर की कैंची पर लगाम लगनी चाहिए।

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