सागर. किसानों को खाद की बोरी के साथ जिप्सम भी लेनी पड़ रही है। जिससे 491 रुपए की खाद उन्हें 540 रुपए की पड़ रही है। जिप्सम न लेने पर दुकानदार उन्हें खाद नहीं देते हैं। सरकारी गोदामों में खाद का टोटा दूर न होने के कारण यह हालात पिछले 10 दिनों से बने हुए हैं।
बोवनी के लिए इस समय किसानों को सिर्फ डीएपी खाद की खाद की जरूरत है। जो जिला विपणन संघ, एपी एग्रो और सहकारी समितियों के गोदामों में नहीं बची है। सिर्फ प्राइवेट दुकानों पर मिल रही है, जिसे दुकानदार मनमानी शर्र्तो पर बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।
मुनाफाखोरी के शिकार हुए किसानों की शिकायत है कि इन पर कृषि विभाग का कोई नियंत्रण ही नहीं है। होता तो हमें जिप्सम न लेनी पड़ती। पीपरा के किसान गोविंद ने बताया कि 491 रुपए की डीएपी खाद की बोरी के साथ 150 रुपए का जिप्सम लेना पड़ा।
जिप्सम की जरूरत ही नहीं थी क्योंकि जुलाई में खरीफ की बोवनी के समय खेत में जिप्सम डाला था। मौजूदा सीजन में अब तक जिले में मांग का आधा खाद ही आया है। रबी सीजन के लिए 44000 टन खाद की जरूरत है। जिले में अब तक 20000 टन खाद आया है।
खाद की कमी के चलते चने एवं गेहूं की बोवनी पिछड़ने के आसार बन गए हैं। अधिकतर किसान सरकारी गोदामों में खाद आने का इंतजार कर रहे हैं। उनका इंतजार जल्द खत्म न हुआ तो वे बिना खाद डाले ही बोवनी करेंगे। रबी के 4.47 लाख हैक्टेयर रकबे में से दो लाख हैक्टेयर में बोवनी हुई है।